सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में तय किया है कि मतदान केवल ईवीएम मशीनों के माध्यम से ही होगा. इस फैसले के तहत, ईवीएम-वीवीपैट का 100 फीसदी मिलान नहीं किया जाएगा. वीवीपैट ने घोषणा की है कि उनकी पर्चियां 45 दिनों तक पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी.
लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग के बीच शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट वेरिफिकेशन की मांग को लेकर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है. कोर्ट के इस फैसले ने ईवीएम के माध्यम से डाले गए वोटों की वीवीपैट की पर्चियों से शत-प्रतिशत मिलान की मांग को झटका दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया है?
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है जिसमें यह स्पष्ट कर दिया गया है कि मतदान केवल ईवीएम मशीन के माध्यम से ही होगा। इसके साथ ही, यह निर्णय किया गया है कि ईवीएम और वीवीपैट के 100 फीसदी मिलान की प्रक्रिया नहीं की जाएगी.45 दिनों तक वीवीपैट की पर्ची सुरक्षित रहेगी. ये पर्चियां उम्मीदवारों के हस्ताक्षर के साथ सुरक्षित रहेगी.
कोर्ट का निर्देश है कि चुनाव के बाद सिंबल लोडिंग यूनिटों को भी सीलकर सुरक्षित किया जाए.समाचार संपादक के रूप में, मुझे खुशी है कि यहाँ बताया गया है कि उम्मीदवारों को नतीजों की घोषणा के बाद तकनीकी टीम द्वारा ईवीएम के माइक्रो कंट्रोलर प्रोग्राम की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं. जिसे चुनाव घोषणा के सात दिनों के भीतर किया जा सकेगा. वहीं, इस दौरान न्यायाधीश दीपांकर दत्ता ने कहा कि किसी भी सिस्टम पर आंख मूंदकर अविश्वास करने से संदेह ही पैदा होता है. लोकतंत्र का मतलब है विश्वास और सौहार्द.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या बोला चुनाव आयोग?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद चुनाव आयोग ने कहा की चुनाव आयोग ने कहा कि कोर्ट के इस फैसले के बाद अब किसी को शक नहीं रहना चाहिए. अब पुराने सवाल खत्म हो जाने चाहिए. सवालों के वोटर के मन में शक होता है. चुनाव सुधार भविष्य में भी जारी रहेगा.
VVPAT क्या है?
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) ने 2013 में VVPAT यानी वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल मशीनें डिजाइन और विकसित की थीं। इसका उद्देश्य वोटरों को वोटिंग प्रक्रिया में विश्वास के लिए एक और स्तर जोड़ना था.
VVPAT मशीनों का पहला इस्तेमाल 2013 के नागालैंड विधानसभा चुनाव के दौरान किया गया था। इसके बाद, 2014 के लोकसभा चुनाव में कुछ सीटों पर भी यह मशीन लगाई गई थी। बाद में, 2017 के गोवा विधानसभा चुनाव में भी इनका इस्तेमाल किया गया.
2019 के लोकसभा चुनाव के समय, भारत में पहली बार वीवीपीएटी मशीनों का उपयोग किया गया था। इस चुनाव में, 17.3 लाख से अधिक वीवीपीएटी मशीनों का उपयोग हुआ था.
कैसे काम करती है मशीन
वोटिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए वीवीपीएटी को लाया गया था. यह मशीन ईवीएम से कनेक्ट रहती है. जैसे ही वोटर वोट डालता है, वैसे ही एक पर्ची निकलती है. इस पर्ची में उस कैंडिडेट का नाम और चुनाव चिन्ह होता है, जिसे उसने वोट दिया होता है. वीवीपीएटी की स्क्रीन पर यह पर्ची 7 सेकंड तक दिखाई देती है. ऐसा इसलिए ताकि वोटर देख सके कि उसका वोट सही उम्मीदवार को गया है। 7 सेकंड बाद यह पर्ची वीवीपीएटी के ड्रॉप बॉक्स में गिर जाती है.
