उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को हुए दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष (NICU) में लगी आग ने 10 मासूमों की जिंदगी छीन ली और 16 बच्चे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। इस त्रासदी ने न केवल अस्पताल प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उन परिवारों को भी गहरे सदमे में डाल दिया है, जिन्होंने अपने बच्चों को हमेशा के लिए खो दिया।
“हाय मेरा बच्चा, एक बार चेहरा ही दिखा दो…”
झांसी मेडिकल कॉलेज के बाहर मातम का सन्नाटा है। एक मां, जिसने कुछ ही दिन पहले अपने बच्चे को जन्म दिया था, दर्द और बेहोशी की हालत में बार-बार कहती है, “हाय मेरा बच्चा, एक बार चेहरा ही दिखा दो…”। आसपास मौजूद लोग उसे संभालने की कोशिश करते हैं, लेकिन उसकी पुकार सभी का दिल छलनी कर देती है।
एक अन्य महिला, जिसने अपनी गोद में बच्चा खो दिया है, रोते हुए कहती है, “हमारा बच्चा नहीं मिल रहा। कोई बता दो, हमारा बच्चा कहां है?”
54 बच्चों का वार्ड खाक, माताओं के आंसुओं का समंदर
झांसी अग्निकांड के समय वार्ड में 54 नवजात बच्चे भर्ती थे। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। NICU में रखी गई जीवनरक्षक मशीनें और उपकरण पूरी तरह जलकर खाक हो गए। घटनास्थल की तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं।
वार्ड में भर्ती बच्चों में से 10 की मौके पर ही मौत हो गई। कई बच्चों को बुरी तरह झुलसी हालत में अन्य अस्पतालों में रेफर किया गया है। आग की भीषणता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वार्ड में रखी एक भी मशीन बची नहीं है।
परिजनों की बेबसी: “हमें कुछ भी नहीं बताया जा रहा”
झांसी मेडिकल कॉलेज के बाहर परिवार वालों की भीड़ लगी है। अफरा-तफरी का माहौल है। हर कोई अपने बच्चे की सलामती की खबर पाने के लिए बेताब है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्हें यह भी नहीं पता कि जिन 10 बच्चों की मौत हुई है, उनमें उनका बच्चा भी शामिल है या नहीं।
एक पीड़ित पिता ने बताया, “वार्ड में 70 बच्चे थे। जब आग लगी, तो जाली तोड़कर बच्चों को बाहर निकाला गया। लेकिन हमारा बच्चा कहां है, कोई कुछ नहीं बता रहा।”
मां की ममता का दर्द: “8 दिन पहले ही जन्मा था…”
झांसी NICU वार्ड में भर्ती बच्चों में से कई ने कुछ ही घंटों पहले इस दुनिया में कदम रखा था। एक बच्चे की ताई ने रोते हुए बताया, “मैं बच्चे की बड़ी मां हूं। हमारा बच्चा नहीं मिल रहा है। अभी 8 दिन पहले ही पैदा हुआ था। उसकी मां भी अस्पताल में भर्ती है।”
अग्निकांड की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती
घटना की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी झांसी रेंज और झांसी मंडलायुक्त को तुरंत मौके पर भेजा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए विस्तृत जांच का आदेश दिया है।
एडीजी जोन कानपुर आलोक सिंह झांसी पहुंचे और राहत कार्यों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा देने का निर्देश दिया है और शनिवार शाम तक पूरी रिपोर्ट मांगी है।
राहत और बचाव कार्य जारी, जांच में लापरवाही की आशंका
फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक टीमें लगातार राहत कार्यों में जुटी हुई हैं। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, इस हादसे की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि, घटना के पीछे अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही की भी आशंका जताई जा रही है।
अधिकारियों ने कहा है कि घटना की विस्तृत जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
“जाली तोड़कर बच्चों को बचाने की कोशिश की…”
घटना के समय NICU में मौजूद स्टाफ ने बताया कि जब आग लगी, तो वे अंदर फंसे बच्चों को बचाने की कोशिश में जुट गए। एक कर्मचारी ने बताया, “हमने तुरंत जाली तोड़कर बच्चों को बाहर निकालना शुरू किया। जो बच्चे बच सकते थे, उन्हें तुरंत बाहर निकाला गया।”
मातम में बदला जश्न: नवजातों की पहली मुस्कान बुझ गई
कुछ परिवार ऐसे थे, जो अपने नवजात को पहली बार गोद में लेने की खुशी का इंतजार कर रहे थे। लेकिन इस हादसे ने उनकी खुशियों को मातम में बदल दिया।
गांव से आए एक दंपति ने कहा, “हमने अपने बच्चे के जन्म का इंतजार महीनों किया। लेकिन अब हमें नहीं पता कि वह जिंदा है या नहीं।”
झांसी अस्पताल प्रशासन कटघरे में, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल
मेडिकल कॉलेज के NICU वार्ड में सुरक्षा मानकों की कमी पर सवाल उठ रहे हैं। वार्ड में फायर अलार्म और अग्निशमन उपकरण पर्याप्त नहीं थे। यह भी सामने आया है कि शॉर्ट सर्किट की समस्या पहले भी रिपोर्ट की गई थी, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया।
घटनास्थल की भयावह तस्वीरें
घटनास्थल की तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें वार्ड पूरी तरह जलकर खाक हो गया है। बच्चों को रखने वाली मशीनें, ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य उपकरण जल चुके हैं। पूरे वार्ड में सिर्फ राख और टूटे हुए सामान दिखाई दे रहे हैं।
सरकार के लिए कड़ा संदेश
इस घटना ने राज्य और केंद्र सरकार के स्वास्थ्य प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि मेडिकल संस्थानों में सुरक्षा मानकों को कितना हल्के में लिया जाता है।
निष्कर्ष: मातम का अंत कब होगा?
झांसी अग्निकांड न केवल एक हादसा है, बल्कि यह उन परिवारों के लिए जीवनभर का गहरा जख्म है, जिन्होंने अपने नवजातों को खो दिया। अब देखना यह है कि सरकार दोषियों को सजा देने और ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाती है।
