अडानी ग्रुप को लेकर नई खबर ने भारतीय शेयर बाजार में भूचाल ला दिया। एक बार फिर हिंडनबर्ग विवाद जैसी स्थिति बनी है। अडानी ग्रुप के खिलाफ न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोपों के बाद शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों को अरबों रुपये का नुकसान हुआ।
शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों को बड़ा झटका
गुरुवार को शेयर बाजार ने उम्मीद के साथ शुरुआत की। गिफ्ट निफ्टी के संकेत सकारात्मक थे, लेकिन अडानी ग्रुप से जुड़ी खबरों ने बाजार को पूरी तरह से पलट दिया। दिनभर के कारोबार के बाद सेंसेक्स 422 अंक गिरकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 23,350 के स्तर पर आ गया।
इस भारी बिकवाली में निवेशकों के लगभग 5.35 लाख करोड़ रुपये डूब गए। खासकर अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली।
अडानी ग्रुप के शेयरों में गिरावट की सूची
| कंपनी का नाम | गिरावट (%) |
|---|---|
| Adani Enterprises | 22.52% |
| Adani Energy Solutions | 20.00% |
| Adani Green Energy | 18.68% |
| Adani Total Gas | 10.73% |
| Adani Power | 9.06% |
| Adani Ports | 13.56% |
| Ambuja Cements | 11.65% |
| ACC | 6.94% |
| NDTV | 0.66% |
| Adani Wilmar | 10.00% |
इसके अलावा, सरकारी बैंकों और बीमा कंपनियों के शेयर भी प्रभावित हुए:
- SBI: 2.75% गिरावट
- IDBI Bank: 2.00% गिरावट
- LIC: 1.44% गिरावट
क्या है मामला?
न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में सुनवाई के दौरान अडानी ग्रुप पर आरोप लगाया गया कि उसने एक सोलर एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को 265 मिलियन डॉलर (करीब 2236 करोड़ रुपये) की रिश्वत दी। यह रिश्वत 2020 से 2024 के बीच कथित तौर पर दी गई थी।
बड़े प्रोजेक्ट से जुड़ी धांधली के आरोप
- आरोप है कि इस सोलर प्रोजेक्ट के जरिए अडानी ग्रुप को 20 सालों में 2 अरब डॉलर से ज्यादा का मुनाफा होने की उम्मीद थी।
- रिश्वत की बात अमेरिकी कंपनी एज्योर पावर ग्लोबल से छुपाई गई।
- झूठे दावों के जरिए बैंकों और निवेशकों से लोन और बॉन्ड्स के माध्यम से 3 अरब डॉलर जुटाए गए।
अडानी ग्रुप ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि ये आरोप सिर्फ आरोप हैं और अदालत में उनका सच साबित होना बाकी है। समूह ने अपने ऑपरेशन्स में पारदर्शिता और नियमों के पालन की प्रतिबद्धता जताई।
अडानी ग्रुप ने एक बयान में कहा:
“हम अपने सभी हितधारकों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि अडानी समूह कानून का पालन करने वाला संगठन है और हम कानून का हर संभव सहारा लेंगे।”
SECI का बयान: जांच की जरूरत नहीं
इस मामले में सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) ने अपनी सफाई पेश की। SECI के चेयरमैन और एमडी आर.पी. गुप्ता ने कहा कि उन्हें इस मामले से जुड़े किसी भी दस्तावेज की जानकारी नहीं है। ऐसे में जांच की जरूरत नहीं लगती।
गुप्ता के अनुसार:
“हमारे पास इस मामले की जांच के लिए कोई आधार नहीं है। हम भारतीय सौर ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
बाजार में हाहाकार: निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
अडानी ग्रुप के शेयरों में गिरावट से सिर्फ निवेशक ही नहीं, बल्कि सरकारी बैंकों और बीमा कंपनियों को भी नुकसान हुआ। कई सरकारी बैंकों ने अडानी ग्रुप को भारी कर्ज दिया है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति पर असर पड़ा।
हिंडनबर्ग विवाद के बाद दूसरी बड़ी चुनौती
हिंडनबर्ग के आरोपों से उबरने के बाद यह मामला अडानी ग्रुप के लिए एक और बड़ा झटका है। इससे उनकी प्रतिष्ठा और वित्तीय स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अडानी ग्रुप के शेयरधारकों को क्या करना चाहिए?
- लंबी अवधि के लिए सोचें: बाजार की अस्थिरता से घबराने के बजाय अपने निवेश को समझदारी से प्रबंधित करें।
- विविधता लाएं: अपने पोर्टफोलियो को विविध बनाएं ताकि एक क्षेत्र की गिरावट का प्रभाव कम हो।
- विशेषज्ञ सलाह लें: किसी भी निवेश निर्णय से पहले विशेषज्ञों की राय लें।
आगे क्या होगा?
निवेशकों की नजर अब अमेरिकी कोर्ट में मामले की सुनवाई और SECI के भविष्य के कदमों पर टिकी है। बाजार को स्थिर होने में समय लग सकता है, लेकिन यह घटना अडानी ग्रुप के लिए एक और बड़ा सबक है।
क्या भारतीय निवेशक इस झटके से उबर पाएंगे? यह तो वक्त ही बताएगा।
