हरियाणा की साइबर क्राइम पुलिस ने हाल ही में एक बड़ी कार्रवाई में एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है। फरीदाबाद और पलवल की पुलिस टीम ने 88 लाख रुपये की ठगी के मामले में 11 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि यह गैंग चाइनीज नागरिकों के इशारे पर काम कर रहा था और हिंदी भाषी लोगों को निशाना बना रहा था।
कैसे हुआ खुलासा? पलवल के अनिल ने खोला मामला
यह साइबर मामला तब सामने आया जब हरियाणा के पलवल जिले के रहने वाले अनिल नाम के व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
अनिल को 19 अक्टूबर को एक फोन कॉल आया, जिसमें ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोपों में गिरफ्तार करने की धमकी दी।
इस कॉल के बाद, अनिल को मानसिक रूप से दबाव में रखते हुए 72 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और जांच के बहाने 88 लाख रुपये उनके खाते से ट्रांसफर करा लिए गए।
गिरोह की गिरफ्तारी: 11 साइबर ठगों पर शिकंजा
पुलिस ने अनिल की शिकायत पर जांच शुरू की और उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश में छापेमारी करते हुए 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में उत्तर प्रदेश के अश्वनी उर्फ लुसी, सोनू कुमार पासवान, रजत वर्मा, उत्कर्ष, अविश, नीरज कुमार, संजीव कुमार और शिवाजी मौर्या शामिल हैं।
मध्य प्रदेश से मनोज, सचिन उपाध्याय और यश दुबे को भी गिरफ्तार किया गया।
कंबोडिया में ठगी की ट्रेनिंग: नौकरी के बहाने फंसाया
पलवल के डीएसपी विशाल कुमार ने खुलासा किया कि यह गिरोह चाइनीज नागरिकों के इशारे पर काम कर रहा था।
इन चाइनीज नागरिकों ने भारतीय युवाओं को नौकरी का झांसा देकर कंबोडिया बुलाया, जहां उन्हें साइबर ठगी की बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती थी।
ट्रेनिंग के बाद, ये लोग भारत लौटकर फर्जी बैंक खाते खरीदते थे और हिंदी भाषी लोगों को ठगी का निशाना बनाते थे।
ठगी का मॉड्यूल: करोड़ों की लूट और फर्जी दस्तावेजों का खेल
जांच में यह भी सामने आया कि ठगों ने 2020 से अब तक करीब 70 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया है।
इनका पूरा नेटवर्क चीन, कंबोडिया, वियतनाम, नेपाल और दुबई जैसे देशों तक फैला हुआ है।
गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने भारी मात्रा में नकदी, 31 मोबाइल फोन, 5 एटीएम कार्ड, 8 चेकबुक, और 4 गाड़ियां बरामद की हैं।
इनमें होंडा सिटी, टाटा सफारी और दो सियाज कारें शामिल हैं।
फर्जी कॉल और डिजिटल अरेस्ट: ठगी का नया तरीका
गिरोह का तरीका बेहद शातिराना था। ये लोग सीबीआई, इनकम टैक्स या बैंक अधिकारी बनकर कॉल करते थे और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे झूठे मामलों का डर दिखाते थे।
इसके बाद पीड़ितों को मानसिक दबाव में रखकर उनसे ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कराते थे।
101 शिकायतें और करोड़ों का नुकसान
पुलिस की जांच में पता चला है कि इस रैकेट के खिलाफ देशभर में 101 एफआईआर और शिकायतें दर्ज हैं।
इनके शिकार ज्यादातर हिंदी भाषी राज्यों के लोग हुए हैं। ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल माध्यमों से चीन भेजा जाता था।
पुलिस की अपील: साइबर ठगी से बचाव के उपाय
पलवल साइबर क्राइम पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार की ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
पुलिस ने यह भी कहा है कि किसी अनजान व्यक्ति से फोन पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और संदिग्ध कॉल्स से सतर्क रहें।
आगे की जांच: क्या है चाइनीज कनेक्शन?
पुलिस अब इस मामले में चाइनीज नागरिकों की संलिप्तता की गहराई से जांच कर रही है।
यह पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट के जरिए भारत से बाहर कितनी रकम भेजी गई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।
निष्कर्ष: सावधानी ही बचाव है
यह मामला एक बार फिर यह बताता है कि साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का इस्तेमाल कर ठग आम लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं।
इसलिए, सतर्क रहें, जागरूक रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
