हरियाणा रैन बसेरे की बदहाली: 5 खामियां जो सर्दी में बेसहारा लोगों की परेशानी बढ़ा रहीं हैं

हरियाणा रैन बसेरे की बदहाली: 5 खामियां जो सर्दी में बेसहारा लोगों की परेशानी बढ़ा रहीं हैं
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लाखों की लागत से बने रैन बसेरे में पुलिस का कब्जा

अंबाला कैंट बस स्टैंड के पास लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए रैन बसेरे की हालत खस्ता है। अमर उजाला की जांच में पाया गया कि यहां एक ओर पुलिस की 40 जवानों की टुकड़ी महीनों से डेरा डाले हुए है, जबकि दूसरी ओर सर्दी से कांपते बेसहारा लोग खुले आसमान तले रातें बिता रहे हैं।

रैन बसेरे के हॉल में पुलिस जवानों के लिए बिस्तर तो लगा हुआ है, लेकिन बाहर फुटपाथ और बस क्यू शेल्टरों के नीचे बेसहारा लोग ठंड से बचने की जद्दोजहद करते नजर आए। पुलिस टुकड़ी शंभू बॉर्डर की ड्यूटी के लिए यहां रुक रही है।

बिना गद्दों और कंबलों के बसों में रैन बसेरा

अंबाला सिटी बस स्टैंड पर विभाग ने दो बसों को रैन बसेरा घोषित किया है। रात करीब साढ़े आठ बजे यहां का निरीक्षण करने पर स्थिति और भी खराब नजर आई। पहली बस में न गद्दे थे और न कंबल। टूटी हुई खिड़कियों से ठंडी हवाएं सीधे अंदर आ रही थीं। दूसरी बस में गद्दे तो थे, लेकिन सभी गीले मिले। किसी भी बस में ठंड से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।

अड्डा इंचार्ज कृष्ण कुमार ने बताया कि लोग रैन बसेरे में आने से कतराते हैं और कुछ ने सामान चोरी करने की घटनाओं को बढ़ावा भी दिया है। इस स्थिति के कारण प्रशासन भी समस्या से जूझ रहा है।

खुले में ठिठुरते लोग

अंबाला सिटी के मुख्य बाजार, रेलवे स्टेशन और अन्य स्थानों पर रात को सड़कों पर सोते हुए कई लोग मिले। ठंड के कारण ये लोग बंद दुकानों के बाहर या फुटपाथ पर कंबलों में लिपटे हुए दिखाई दिए। इन स्थानों पर रैन बसेरों की जानकारी देने वाला कोई कर्मचारी तैनात नहीं था।

छावनी बस स्टैंड पर फर्श पर यात्री रात गुजारते दिखे। इनमें से कई लोग सुबह की पहली बस पकड़ने की तैयारी कर रहे थे। डिवाइडर, ओवरब्रिज के नीचे, और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी लोग सर्दी के बीच लेटे हुए दिखे।

सुविधाओं का अभाव, सुरक्षा नदारद

रैन बसेरे में सुरक्षा की भारी कमी है। सीसीटीवी कैमरे और इन्वर्टर खराब हैं। सोलर पैनल दो साल पहले आंधी में टूट गए थे और अब तक उनकी मरम्मत नहीं हुई है। इसके अलावा, यात्रियों के लिए लगाए गए एलसीडी भी खराब पड़ी हैं। ऐसी स्थिति में अगर कोई अनहोनी घटना हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?

प्रशासन की प्रतिक्रिया

अंबाला नगर परिषद के चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर विनोद बेनिवाल ने स्वीकार किया कि व्यवस्थाओं में खामियां हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस टुकड़ी को अन्यत्र स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि सोमवार को रैन बसेरों का निरीक्षण किया जाएगा और बेसहारा लोगों को सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

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ठंडी हवाओं में दयनीय स्थिति

सर्द रातों में रैन बसेरों का लाभ उठाने के बजाय लोग ठंड में मरने को मजबूर हैं। प्रशासन द्वारा लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए रैन बसेरों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और अव्यवस्थित प्रबंधन के कारण जरूरतमंदों की मदद नहीं हो पा रही है। गीले गद्दे, टूटी खिड़कियां और बिना कर्मचारियों की मौजूदगी में ये रैन बसेरे केवल नाम मात्र के बनकर रह गए हैं।

भविष्य की उम्मीद

समय रहते प्रशासन इन समस्याओं का समाधान कर पाए, तो शायद यह स्थिति सुधर सकती है। हालांकि, अब यह देखना बाकी है कि प्रशासन द्वारा किए गए वादों पर अमल होता है या नहीं।

निष्कर्ष

सर्दियों के इस कठिन दौर में जहां जरूरतमंदों को मदद की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, वहां रैन बसेरों की यह दयनीय स्थिति सोचने पर मजबूर करती है। प्रशासन को त्वरित कार्रवाई कर इन समस्याओं का समाधान करना चाहिए ताकि जरूरतमंद लोग ठंड से राहत पा सकें।

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