गुरुग्राम: बैंक के असिस्टेंट मैनेजर की साइबर ठगी में संलिप्तता, 35 लाख रुपये की ठगी में दिया स्कैमर्स का साथ

गुरुग्राम: बैंक के असिस्टेंट मैनेजर की साइबर ठगी में संलिप्तता, 35 लाख रुपये की ठगी में दिया स्कैमर्स का साथ
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शेयर बाजार में निवेश का लालच देकर किया गया बड़ा साइबर फ्रॉड

हरियाणा के गुरुग्राम से साइबर ठगी का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें एक बैंक कर्मचारी की भूमिका ने सभी को चौंका दिया है। इंडसइंड बैंक के लाजपत नगर शाखा में सहायक प्रबंधक (Assistant Manager) के रूप में कार्यरत हरविंदर सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सिंह पर आरोप है कि उन्होंने साइबर अपराधियों की मदद से 35.69 लाख रुपये की ठगी को अंजाम देने में मदद की।

शेयर बाजार में अधिक रिटर्न का लालच देकर ठगा

पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया कि साइबर ठगों ने उसे शेयर बाजार में अधिक रिटर्न का लालच दिया। जुलाई 2024 में पीड़ित को फर्जी कॉल और ईमेल के जरिए संपर्क किया गया। उसे बताया गया कि अगर वह एक विशेष योजना में निवेश करता है, तो उसे बेहद उच्च रिटर्न मिलेगा। लालच में आकर पीड़ित ने 35.69 लाख रुपये निवेश कर दिए।

जब लंबे समय तक कोई रिटर्न नहीं मिला और संपर्क करने की कोशिशें नाकाम रहीं, तब पीड़ित को एहसास हुआ कि उसके साथ ठगी हो गई है। इसके बाद उसने 27 जुलाई को गुरुग्राम साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

कैसे हुआ खुलासा?

शुरुआती जांच में पुलिस ने पाया कि ठगों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक नकली फर्म के नाम पर बैंक खाता खुलवाया था। जांच आगे बढ़ने पर यह भी सामने आया कि इस खाते को खोलने में हरविंदर सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

पुलिस ने इस मामले में पहले ही योगेंद्र भाटी और विक्रम शाही नामक दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ के दौरान इन आरोपियों ने खुलासा किया कि बैंक खाता खोलने में उन्हें हरविंदर सिंह से मदद मिली थी।

30,000 रुपये की मामूली रकम में दिया स्कैमर्स का साथ

पुलिस के अनुसार, हरविंदर सिंह ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खाता खोलने के बदले 30,000 रुपये लिए थे। इस मामूली रकम के लिए उन्होंने अपनी बैंक की जिम्मेदारी को ताक पर रख दिया और ठगों का साथ दिया।

एसीपी साइबर प्रियांशु दीवान ने बताया कि हरविंदर सिंह को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है।

साइबर क्राइम की बढ़ती घटनाएं: फरवरी में भी हुआ था बड़ा घोटाला

यह पहली बार नहीं है जब गुरुग्राम में बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से साइबर ठगी का मामला सामने आया है। इसी साल फरवरी 2024 में भी एक ऐसा ही मामला दर्ज किया गया था। उस समय कोटक महिंद्रा बैंक की एमजी रोड शाखा से जुड़े तीन बैंक अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था।

फरवरी में 2000 फर्जी बैंक खातों से किया गया था फ्रॉड

फरवरी में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल थे:

  • मोहित राठी (असिस्टेंट मैनेजर)
  • महेश कुमार (डिप्टी मैनेजर)
  • विश्वकर्मा मौर्य (डिप्टी मैनेजर)
  • हयात (स्कैम टीम का मुख्य सदस्य)

इन आरोपियों ने 2000 से अधिक फर्जी बैंक खाते खोले थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया गया था।

कैसे करते थे ठगी?

इन बैंक अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खोले। इन खातों में पीड़ितों से ठगी की गई रकम जमा कराई जाती थी। इसके बाद यह पैसा विभिन्न फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, जिससे पुलिस के लिए पैसे का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।

गुरुग्राम में साइबर ठगी का बढ़ता खतरा

गुरुग्राम जैसे हाई-टेक शहर में साइबर क्राइम के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। साइबर ठग हर बार नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। इस बार तो बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता ने भी सभी को हैरान कर दिया है।

साइबर क्राइम यूनिट की सतर्कता बढ़ी

इन घटनाओं के बाद गुरुग्राम साइबर क्राइम यूनिट ने सतर्कता बढ़ा दी है। एसीपी प्रियांशु दीवान ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही, बैंक कर्मचारियों के दस्तावेजों और उनके लेन-देन की निगरानी भी बढ़ा दी गई है।

बचाव के उपाय: साइबर ठगी से कैसे बचें?

पुलिस ने आम जनता को साइबर ठगी से बचने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:

  1. अधिक रिटर्न के लालच से बचें: कोई भी निवेश योजना जो अत्यधिक रिटर्न का वादा करती है, वह धोखाधड़ी हो सकती है।
  2. असली और फर्जी कॉल की पहचान करें: अनजान नंबरों से आने वाले कॉल और ईमेल को सावधानी से जांचें।
  3. बैंक खातों की नियमित निगरानी करें: अपने बैंक खाते में होने वाले सभी लेन-देन पर नजर रखें।
  4. फर्जी लिंक पर क्लिक न करें: किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें, खासकर यदि वह बैंक या निवेश से संबंधित हो।
  5. साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करें: यदि आपको किसी संदिग्ध गतिविधि का सामना करना पड़ता है, तो तुरंत 112 या साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करें।

निष्कर्ष

गुरुग्राम में सामने आया यह मामला न केवल साइबर सुरक्षा पर सवाल उठाता है, बल्कि बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और जिम्मेदारी की कमी को भी उजागर करता है। बैंक ग्राहकों को चाहिए कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करें, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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