कर्म सिंह डांगरा: समाज सेवा और सादगी के प्रतीक का निधन
हरियाणा के प्रतिष्ठित पूर्व विधायक और समर्पित समाजसेवी कर्म सिंह डांगरा ने 104 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। सोमवार देर रात लगभग तीन बजे, हिसार के जिंदल अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका जन्म 14 अगस्त 1920 को हरियाणा के गांव डांगरा में हुआ था। उनके जीवन का हर पहलू, उनकी सादगी, ईमानदारी और समाजसेवा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।
साधारण जीवन, असाधारण व्यक्तित्व
कर्म सिंह का बचपन गांव डांगरा में बेहद सादगीपूर्ण तरीके से बीता। एक किसान परिवार में जन्मे कर्म सिंह ने कठिन परिश्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ अपने जीवन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। 1963 में, उन्हें उनके गांव के सरपंच के रूप में चुना गया। उनके नेतृत्व और सामाजिक कार्यों के चलते वे इस पद पर लंबे समय तक बने रहे।
राजनीतिक सफर की शुरुआत: जनता पार्टी के साथ जुड़ाव
कर्म सिंह डांगरा ने 1977 में टोहाना विधानसभा क्षेत्र से जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और विधायक बने। यह वह दौर था जब जनता पार्टी राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही थी। विधायक बनने के बाद उन्होंने अपने क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और कृषि क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान दिया।
क्षेत्रीय विकास में अग्रणी भूमिका
अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने ग्रामीण विकास के लिए कई योजनाओं को क्रियान्वित किया। टोहाना क्षेत्र में सड़कों, सिंचाई और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में उनका योगदान सराहनीय रहा। वे हमेशा अपने क्षेत्र की जनता के साथ जुड़कर उनकी समस्याओं का समाधान करते रहे।
सामाजिक सेवाओं में उत्कृष्ट योगदान
कर्म सिंह केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहे। वे सहकारी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों से गहराई से जुड़े रहे। उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं पर एक नजर:
- 1950 से 1986: हिसार सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के डायरेक्टर के रूप में कार्य।
- 1968 से 1969: हिसार सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन पद पर रहे।
- 1952 से 1957: ग्राम पंचायत डांगरा के सदस्य।
- 1960 से 1971: ब्लॉक समिति टोहाना के सदस्य।
- 1971 से 1976: मार्केटिंग सोसाइटी टोहाना के डायरेक्टर।
- 1988 से 1992: नेशनल सीड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के डायरेक्टर।
उनकी कार्यशैली में हमेशा जनता के हित सर्वोपरि रहे। उन्होंने हर कदम पर अपने मूल्यों और सिद्धांतों का पालन किया।
परिवार और निजी जीवन
उनके पोते रमेश कुमार और सत्यवान डांगरा ने उनके संघर्षमय जीवन की झलकियों को साझा करते हुए बताया कि उनके दादा ने चौधरी देवीलाल जैसे प्रभावशाली नेताओं के साथ काम किया। उन्होंने समाज के सुधार के लिए कई अहम फैसले लिए।
- 1986 में न्याय युद्ध: चौधरी देवीलाल के नेतृत्व में उन्होंने दिल्ली तक पैदल यात्रा की।
- 1987 से 1988: हरियाणा खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के चेयरमैन नियुक्त हुए।
- 1992 से वर्तमान: राज्य कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में पार्टी को सेवा प्रदान की।
उनका परिवार और पूरा गांव डांगरा उनके विचारों और कार्यों को संजोकर आगे बढ़ने की प्रेरणा लेता है।
अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब
कर्म सिंह का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव डांगरा में किया गया, जहां उनके पुत्र रमेश कुमार ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले गणमान्य लोगों की सूची लंबी थी। राज्यसभा सांसद सुभाष बराला, पूर्व कैबिनेट मंत्री देवेंद्र बबली, कांग्रेस नेता निशान सिंह, इनेलो नेता डॉ. वीरेंद्र सिंह, और सरपंच एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रणवीर गिल जैसे दिग्गज उपस्थित रहे।
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नेताओं की श्रद्धांजलि
- सुभाष बराला ने कहा: “कर्म सिंह डांगरा स्वच्छता के प्रति जागरूक थे और उनकी सादगी दूसरों के लिए प्रेरणादायक है।”
- देवेंद्र बबली ने कहा: “कर्म सिंह डांगरा गांव की पहचान कर्म सिंह के कारण ही थी। उन्होंने पूरे क्षेत्र में विकास की मिसाल पेश की।”
- निशान सिंह ने कहा: “उनके साथ काम करते हुए मैंने धैर्य और विनम्रता सीखी। उनका जीवन संघर्ष और समर्पण का प्रतीक है।”
प्रेरणा स्रोत बने कर्म सिंह डांगरा
कर्म सिंह डांगरा ने समाज सेवा और राजनीति के क्षेत्र में जो आदर्श स्थापित किए, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। उनकी सादगी और ईमानदारी ने उन्हें एक आदर्श जननेता के रूप में स्थापित किया। उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
