सरकारी अस्पताल में इलाज सस्ता जरूर, लेकिन जब जांच ही न हो तो मरीज जाएं कहां? करनाल के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेज में खून की कई जांच बंद और एक्स-रे फिल्म खत्म होने से मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज करनाल जांच ठप: खून की टेस्ट बंद, एक्स-रे फिल्म खत्म, मरीजों की बढ़ी परेशानी
करनाल। हरियाणा के प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज इन दिनों मरीजों के लिए राहत की बजाय परेशानी का कारण बनता जा रहा है। अस्पताल में कई जरूरी रक्त जांच ठप हो गई हैं और एक्स-रे विभाग में फिल्म खत्म होने से मरीजों को रिपोर्ट तक नहीं मिल पा रही है।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आने वाले मरीजों को एक्स-रे फिल्म की जगह मोबाइल फोन में स्क्रीन की फोटो खींचकर डॉक्टर को दिखाने की सलाह दी जा रही है।
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों को अब निजी प्रयोगशालाओं और डायग्नोस्टिक सेंटर का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
रोजाना 1500 से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं ओपीडी
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 1500 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की होती है जिन्हें डॉक्टर उपचार शुरू करने से पहले रक्त जांच कराने की सलाह देते हैं।
लेकिन पिछले कई दिनों से अस्पताल की लैब में कई महत्वपूर्ण जांचें बंद पड़ी हैं। इनमें शामिल हैं:
- सीबीसी (CBC)
- थायरॉयड प्रोफाइल
- विटामिन B-12
- विटामिन D-3
- ब्लड शुगर
ये सभी जांचें सामान्य बीमारी से लेकर गंभीर रोगों की पहचान के लिए बेहद जरूरी मानी जाती हैं।
मरीजों का कहना है कि डॉक्टर पर्ची पर जांच लिख देते हैं, लेकिन जब वे लैब में पहुंचते हैं तो वहां से यह कहकर लौटा दिया जाता है कि किट उपलब्ध नहीं है।
मरीजों को निजी लैब का सहारा
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जांच सुविधा उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को मजबूर होकर निजी प्रयोगशालाओं में जांच करवानी पड़ रही है।
निजी लैब में इन जांचों की कीमत 500 रुपये से लेकर 3000 रुपये तक पहुंच जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह खर्च भारी साबित हो रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए यह स्थिति और भी कठिन है, क्योंकि वे सरकारी अस्पताल में सस्ता इलाज मिलने की उम्मीद लेकर आते हैं।
एक्स-रे फिल्म खत्म, मोबाइल से फोटो दिखाने की सलाह
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के एक्स-रे विभाग में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
यहां मरीजों के एक्स-रे तो किए जा रहे हैं, लेकिन फिल्म खत्म होने के कारण उनकी प्रिंट रिपोर्ट नहीं दी जा रही।
ऐसे में कई मरीजों को यह कहा जा रहा है कि वे एक्स-रे मशीन की स्क्रीन की फोटो अपने मोबाइल फोन में खींच लें और वही तस्वीर डॉक्टर को दिखा दें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था कई मामलों में सही निदान के लिए पर्याप्त नहीं होती, क्योंकि मोबाइल फोटो में स्पष्टता कम हो सकती है।
बुजुर्ग मरीजों के लिए मुश्किल
मोबाइल से एक्स-रे फोटो दिखाने की व्यवस्था सभी मरीजों के लिए संभव नहीं है।
- कई बुजुर्ग मरीजों के पास स्मार्टफोन नहीं होता
- कुछ लोग मोबाइल इस्तेमाल करना नहीं जानते
- कई मरीज अकेले आते हैं, जिनके पास फोटो लेने वाला कोई नहीं होता
ऐसे मरीजों को बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
मरीज बोले – सरकारी अस्पताल में भी जांच नहीं
“जांच ही नहीं हो पा रही”
खुडक जहांगीर गांव की रहने वाली सोनी ने बताया:
“कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज आने से पहले सोचा था कि यहां सस्ता और बेहतर इलाज मिल जाएगा। लेकिन यहां तो जांच ही नहीं हो पा रही हैं। मजबूरन अब निजी लैब में जांच करवानी पड़ेगी।”
“एक्स-रे की फोटो दिखा दो”
वसंत विहार निवासी सनोज ने बताया:
“कुछ दिन पहले चोट लगी थी। दर्द ठीक नहीं हुआ तो डॉक्टर को दिखाने आया। डॉक्टर ने एक्स-रे लिखा, लेकिन यहां कहा गया कि फिल्म नहीं है। एक्स-रे स्क्रीन की फोटो खींचकर डॉक्टर को दिखा देना।”
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
करनाल जिले में यह मेडिकल कॉलेज सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।
यहां सिर्फ करनाल ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों के मरीज भी इलाज के लिए आते हैं।
ऐसे में जरूरी जांचों का बंद होना और एक्स-रे फिल्म खत्म होना अस्पताल की व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज स्तर के अस्पताल में इस तरह की स्थिति नहीं होनी चाहिए।
इलाज में देरी का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि मरीजों की जरूरी जांच समय पर न हो तो:
- बीमारी की सही पहचान नहीं हो पाती
- इलाज में देरी होती है
- कई मामलों में बीमारी गंभीर हो सकती है
खासतौर पर थायरॉयड, शुगर और विटामिन की जांच शरीर की कई समस्याओं का पता लगाने में अहम भूमिका निभाती है।
प्रशासन का पक्ष
इस मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि कुछ किटों की कमी के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है और इसे जल्द दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. एमके गर्ग ने बताया:
“कुछ किटों की कमी है। इस कमी को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। वित्तीय क्षमता के अनुसार लगातार बेहतरी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।”
क्या है समाधान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या से बचने के लिए प्रशासन को:
- लैब किट का पर्याप्त स्टॉक रखना चाहिए
- एक्स-रे फिल्म की नियमित सप्लाई सुनिश्चित करनी चाहिए
- डिजिटल रिपोर्ट सिस्टम लागू करना चाहिए
- मरीजों को ऑनलाइन रिपोर्ट डाउनलोड की सुविधा देनी चाहिए
यदि ऐसा किया जाता है तो मरीजों को काफी राहत मिल सकती है।
डिजिटल हेल्थ सिस्टम की जरूरत
आज देश के कई बड़े सरकारी अस्पतालों में डिजिटल एक्स-रे और ऑनलाइन रिपोर्ट सिस्टम लागू किया जा चुका है।
इससे मरीजों को फिल्म की जरूरत नहीं पड़ती और डॉक्टर सीधे कंप्यूटर पर रिपोर्ट देख सकते हैं।
यदि करनाल के मेडिकल कॉलेज में भी इस तरह की व्यवस्था लागू हो जाए तो भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सकता है।
