10 जगहों पर छापे, खालिस्तानी आतंकियों के 3 बड़े राज़ सामने आए

10 जगहों पर छापे, खालिस्तानी आतंकियों के 3 बड़े राज़ सामने आए
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हरियाणा-पंजाब में खालिस्तानी आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश: एनआईए के साहसिक कदमों से टूट रहा आतंक का गठजोड़

विदेश से साजिश रचते खालिस्तानी आतंकी: गैंगस्टरों के नेटवर्क से बना रहे जाल

एनआईए के वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो खालिस्तानी आतंकी विदेश में बैठकर हमलों की साजिश रचते हैं। इसके बाद वे स्थानीय गैंगस्टरों के नेटवर्क के जरिये अपने गुर्गों को चुनते हैं, जो उनके खतरनाक मंसूबों को अंजाम देते हैं। आतंकी संगठन अपने गुर्गों को हथियार और गोला-बारूद पहुंचाने के लिए ‘डेड ड्रॉप मॉडल’ का इस्तेमाल कर रहे हैं।

यह मॉडल एक ऐसी खुफिया जगह का इस्तेमाल करता है, जिसका पता केवल आतंकी और उसके हैंडलर को होता है। यहां हथियार, निर्देश और अन्य संसाधन पहुंचाए जाते हैं, ताकि हमले को सफल बनाया जा सके।

पीलीभीत एनकाउंटर से मिली अहम कड़ियां

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में तीन खालिस्तानी आतंकियों के एनकाउंटर के बाद एनआईए ने जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। हरियाणा और पंजाब में विभिन्न स्थानों पर एनआईए की छापेमारी से आतंकियों के डेड ड्रॉप मॉडल की सटीक जानकारी मिली।

एनआईए ने बताया कि ये आतंकी संगठन केवल हथियार पहुंचाने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनकी साजिश बेहद संगठित होती है। वे अपने हैंडलर्स से जुड़ने के लिए तकनीकी साधनों का उपयोग कर रहे हैं और आतंक के नेटवर्क को मजबूत बनाने में जुटे हैं।

गैंगस्टरों को बनाया खालिस्तानी साजिश का हिस्सा

हरियाणा और पंजाब में सक्रिय गैंगस्टरों के साथ आतंकी संगठन मिलकर काम कर रहे हैं। एनआईए की जांच में यह सामने आया है कि आतंकी संगठन स्थानीय गैंगस्टरों को फंडिंग देकर अपने मंसूबों को अंजाम देते हैं।

गुरुग्राम में 10 दिसंबर को सेक्टर-29 स्थित दो क्लबों के बाहर हुए बम धमाकों का मामला इसका बड़ा उदाहरण है। जांच में पाया गया कि ये धमाके आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से जुड़े हुए थे। गिरफ्तार आरोपी, कुख्यात गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के नेटवर्क का हिस्सा था।

हाईटेक तकनीक से बढ़ रहे आतंकी खतरे

एनआईए के सूत्रों के मुताबिक, आतंकी संगठन अब हाईटेक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। इसमें इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI), बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) और खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) जैसे समूहों की भूमिका अहम है।

इन संगठनों को अमेरिका, कनाडा और अन्य देशों से फंडिंग प्राप्त हो रही है। इस फंडिंग के जरिये न केवल गैंगस्टरों, बल्कि कुछ साधारण व्यक्तियों को भी आतंकी गतिविधियों में शामिल किया जा रहा है।

एनआईए के कड़े कदम: आतंकी-गैंगस्टर गठजोड़ पर लगाम

एनआईए आतंकियों से दो कदम आगे बढ़कर उनके मॉड्यूल को खत्म करने में लगी है। एजेंसी ने हरियाणा और पंजाब में कई स्थानों पर छापेमारी कर बड़ी संख्या में दस्तावेज़, हथियार और तकनीकी उपकरण जब्त किए हैं।

एनआईए की कोशिश है कि आतंकी संगठनों और गैंगस्टरों के इस गठजोड़ को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए। इसके लिए विशेष तकनीकी टीम और खुफिया एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।

आतंकियों का फंडिंग मॉडल: गैंगस्टरों के जरिये जुटा रहे पैसे

एनआईए की जांच में सामने आया कि आतंकी संगठन गैंगस्टरों के जरिये फंड जुटा रहे हैं। गुरुग्राम बम धमाके की जांच में पाया गया कि आरोपी आतंकी संगठन बब्बर खालसा के लिए फंडिंग करता था। ये पैसा खालिस्तानी साजिशों को अंजाम देने के लिए उपयोग किया जाता है।

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सरकार और एजेंसियों के लिए चुनौती

खालिस्तानी आतंकी मॉड्यूल की बढ़ती सक्रियता सरकार और जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। गैंगस्टरों और आतंकियों का गठजोड़ न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह क्षेत्रीय स्थिरता को भी प्रभावित कर रहा है।

एनआईए की जांच के तहत जो खुलासे हो रहे हैं, वे इस गठजोड़ को खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। अधिकारियों का कहना है कि आतंकियों के फंडिंग और तकनीकी मॉडल पर लगातार नजर रखी जा रही है।

निष्कर्ष:

हरियाणा और पंजाब में खालिस्तानी आतंकी मॉड्यूल का उभरना चिंता का विषय है। लेकिन एनआईए की सतर्कता और साहसिक कार्रवाई इस खतरे को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सरकार और एजेंसियों के समन्वित प्रयास से यह उम्मीद है कि जल्द ही आतंकी संगठनों का यह जाल पूरी तरह खत्म होगा।

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