अब रजिस्ट्री के लिए टोकन की लाइन नहीं लगेगी—सरकार ने सिस्टम में ऐसा बदलाव किया है, जिससे 7 दिन में आपकी रजिस्ट्री पूरी हो सकेगी… और अगर फाइल रुकी तो कर्मचारी को जवाब देना होगा!
करनाल | तहसीलों में पेपरलेस रजिस्ट्री टोकन नंबर की नई व्यवस्था लागू, अब यूनिक फाइल नंबर से ही होगी पूरी प्रक्रिया
हरियाणा की तहसीलों में लागू हुई पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था में अब एक बड़ा और राहत देने वाला बदलाव कर दिया गया है। अब पेपरलेस रजिस्ट्री टोकन नंबर लेने के लिए नागरिकों को पोर्टल पर अलग से भटकना नहीं पड़ेगा। रजिस्ट्री आवेदन के समय जो यूनिक/फाइल नंबर जनरेट होगा, वही आगे चलकर टोकन नंबर के रूप में काम करेगा।
इस बदलाव का सीधा लाभ आम नागरिक को मिलेगा, क्योंकि इससे रजिस्ट्री प्रक्रिया तेज, ज्यादा पारदर्शी और अपेक्षाकृत भ्रष्टाचार-मुक्त होगी। खास बात यह है कि प्रशासन ने इस नए सिस्टम के साथ रजिस्ट्री की समय सीमा भी तय कर दी है—अब दावा किया जा रहा है कि 7 दिनों के भीतर पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया समाप्त कर दी जाएगी।
राजस्व विभाग द्वारा रजिस्ट्री सॉफ्टवेयर में यह अपडेट इसलिए किया गया, क्योंकि नवंबर में जब पेपरलेस रजिस्ट्री लागू हुई थी, तब सबसे बड़ी समस्या टोकन नंबर जारी न होना और स्लॉटिंग का उलझना बन गया था। तकनीकी टीमों और एनआईसी के प्रयासों के बाद भी आम लोगों को “ऑनलाइन” के नाम पर “ऑफलाइन” वाली तकलीफें झेलनी पड़ रही थीं। अब विभाग ने समस्या की जड़ पर चोट करते हुए यूनिक नंबर को ही टोकन नंबर मानने का फैसला किया है।
अब क्या बदला है? (सीधी भाषा में)
पहले नागरिक ऑनलाइन आवेदन करने के बाद रजिस्ट्री से जुड़ी आगे की प्रक्रिया के लिए अलग से टोकन नंबर निकालते थे। यह टोकन नंबर मिलने में देरी, स्लॉट न मिलना, या तकनीकी रुकावटें आम थीं।
अब नया सिस्टम यह कहता है—
- आवेदन करते समय जो फाइल/यूनिक नंबर मिलेगा
- वही आपका टोकन नंबर है
- उसी क्रम में फाइल आगे बढ़ेगी
- फोटो/बायोमेट्रिक के लिए अलग टोकन नहीं लेना पड़ेगा
यानी सिस्टम की भाषा में कहें तो—टोकन नंबर की बोझिल प्रक्रिया खत्म, और फाइल नंबर ही “पास” बन गया।
7 दिन की डेडलाइन: अब टालमटोल की गुंजाइश कम
राजस्व विभाग ने एक और बड़ा कदम उठाया है—समय सीमा तय करना।
अब ऑनलाइन आवेदन के बाद संबंधित कर्मचारी/कार्यालय को 7 दिन के भीतर रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा।
अगर रिपोर्ट समय पर नहीं हुई तो—
- सिस्टम में यह बात दर्ज हो जाएगी
- जिम्मेदारी तय होगी
- देरी/लापरवाही पर कार्रवाई संभव होगी
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पुराने सिस्टम में अक्सर फाइलें “लंबित” के नाम पर हफ्तों/महीनों तक अटकती रहती थीं। अब फाइल रुकती है तो कर्मचारी को उसका वाजिब कारण बताना होगा, या आवेदक से संपर्क कर आपत्ति दूर करानी होगी।
नवंबर में लागू हुई पेपरलेस व्यवस्था क्यों फंसी?
नवंबर माह में पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू होने के बाद स्थिति यह बन गई थी कि—
- पोर्टल पर टोकन कट नहीं रहे थे
- स्लॉट बुकिंग में देरी
- कई बार आवेदन बीच में छूटते ही फाइल रिजेक्ट
- अधूरे दस्तावेज अपलोड होने पर ऑब्जेक्शन
- आधार/प्रॉपर्टी आईडी मिसमैच के केस बहुत ज्यादा
इस वजह से पूरी प्रक्रिया “पेपरलेस” तो हो गई, लेकिन लोगों को महसूस हुआ कि पेपरलेस मतलब परेशानी ज्यादा हो गई।
विभाग के सामने चुनौती थी—या तो सिस्टम को सरल किया जाए या जनता का भरोसा टूट जाएगा। अब यूनिक नंबर को टोकन बनाने का निर्णय इसी दिशा में सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है।
मनमानी पर लगाम, निष्पक्षता का दावा
नई व्यवस्था में फाइलें “पहले आओ, पहले निपटाओ” के सिद्धांत पर आगे बढ़ेंगी। यानी—
- हर फाइल यूनिक नंबर के क्रम में आगे बढ़ेगी
- किसी की फाइल आगे-पीछे करने की गुंजाइश कम
- कर्मचारियों की मनमर्जी/सेटिंग पर रोक
यह बदलाव प्रशासन के उस दावे को मजबूत करता है कि पेपरलेस सिस्टम का मकसद केवल ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि प्रक्रिया को निष्पक्ष और समयबद्ध बनाना है।
एक-एक जिले से 30 से 60 करोड़ राजस्व अटका था
पेपरलेस प्रणाली के शुरुआती दौर में सबसे बड़ा नुकसान केवल जनता को नहीं हुआ, बल्कि सरकार को भी हुआ।
आंकड़ों के अनुसार पहली से 30 नवंबर के बीच—
- पुरानी व्यवस्था के मुकाबले 1% रजिस्ट्री ही हो पाई
- तकनीकी दिक्कतों के कारण टोकन कट नहीं पाए
- कई जिलों में 30 से 60 करोड़ रुपये तक का राजस्व अटक गया
यानी रजिस्ट्री धीमी हुई तो स्टांप ड्यूटी और फीस का राजस्व भी रुक गया। यही वजह है कि सरकार ने अब सॉफ्टवेयर अपडेट कर सुधार किए।
ऑब्जेक्शन की बड़ी वजहें और समाधान (अपडेट में क्या बदला?)
राजस्व विभाग ने ऑब्जेक्शन से जुड़ी दिक्कतों पर भी समाधान लागू किए हैं—
1) आवेदन बीच में छूटता था तो फाइल रिजेक्ट
अब पोर्टल अपडेट किया गया है ताकि यह समस्या कम हो।
2) अपॉइंटमेंट स्लॉट बुकिंग में देरी
अब अलग से टोकन नहीं लेना पड़ेगा, इससे प्रक्रिया सरल होगी।
3) अधूरे दस्तावेज अपलोड हो रहे थे
अब स्पष्ट है कि दस्तावेज पूरा करना ही होगा।
4) आधार कार्ड/नगर निगम प्रॉपर्टी आईडी मिसमैच
यह सबसे आम ऑब्जेक्शन था, अब पोर्टल में अपडेट किया गया है।
एक सप्ताह में करनाल जिले में रजिस्ट्री का हाल (डेटा आधारित रिपोर्ट)
पोर्टल अपडेट और सुधारों के बाद रजिस्ट्री संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
| तिथि | रजिस्ट्री | कुल ट्रांजेक्शन (करोड़) | स्टांप ड्यूटी (करोड़) |
|---|---|---|---|
| 29 दिसंबर | 149 | 23.56 | 1.37 |
| 30 दिसंबर | 172 | 41.01 | 2.32 |
| 31 दिसंबर | 140 | 34.36 | 2.25 |
| 01 जनवरी | 58 | 19.12 | 1.19 |
| 02 जनवरी | 133 | 38.01 | 1.78 |
| 05 जनवरी | 101 | 35.39 | 2.16 |
इन आंकड़ों से साफ है कि नई व्यवस्था को स्थिर करने के बाद ट्रांजेक्शन व स्टांप ड्यूटी की रिकवरी भी बेहतर हो रही है।
प्रशासन का पक्ष: “तकनीकी दिक्कतें दूर हुईं”
जिला राजस्व अधिकारी मनीष यादव के अनुसार—
पहले लोग टोकन लेकर आ जाते थे। अब पेपरलेस रजिस्ट्री में बदलाव किया है। सभी दस्तावेज और जानकारी पहले पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। तहसीलदार कार्यालय में जांच होगी। प्रक्रिया पूरी होने पर व्यक्ति निर्धारित तिथि में आकर फोटो खिंचवाएगा, अलग से टोकन नहीं लेना पड़ेगा। शुरुआती दिक्कतें दूर हो चुकी हैं और संख्या बढ़ रही है।
जनता के लिए क्या सीख? (रजिस्ट्री करने वालों के लिए गाइड)
अगर आप पेपरलेस रजिस्ट्री करा रहे हैं, तो ध्यान रखें—
- आवेदन भरते समय सभी दस्तावेज पूरे रखें
- आधार/प्रॉपर्टी आईडी का डेटा मिलान कर लें
- फाइल नंबर को सुरक्षित रखें (यही टोकन है)
- पोर्टल पर स्टेटस लगातार चेक करते रहें
- 7 दिन में अपडेट न मिले तो शिकायत/फॉलोअप करें
