गणतंत्र दिवस 2025 की परेड ने हरियाणा राज्य की झांकी को प्रमुख स्थान प्रदान किया, जिसने न केवल राज्य के सांस्कृतिक वैभव को दर्शाया, बल्कि औद्योगिक प्रगति, खेल क्षेत्र में हरियाणा की भूमिका और महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी जोर दिया। झांकी में जहाँ एक ओर धार्मिक एवं ऐतिहासिक संदेश का चित्रण किया गया, वहीं दूसरी ओर राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और खेल क्षेत्र में हासिल की गई उच्चतम उपलब्धियों को भी प्रस्तुत किया गया। यह प्रदर्शनी दर्शकों के लिए न सिर्फ़ अविस्मरणीय रही, बल्कि देशभर में हरियाणा की असाधारण प्रगति को भी रेखांकित किया।
भगवद गीता का दिव्य संदेश और महाभारत का अद्वितीय दृश्य:
हरियाणा की गणतंत्र दिवस परेड में प्रस्तुत झांकी के प्रारंभ में महाभारत के युद्ध का दृश्य दर्शाया गया था, जिसमें भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को कुरुक्षेत्र के युद्ध भूमि पर गीता का उपदेश दे रहे हैं। यह दृश्य मात्र एक धार्मिक प्रतीक नहीं था, बल्कि यह हरियाणा के कुरुक्षेत्र के महत्व को भी रेखांकित करता था, जहाँ भगवान कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था। इस दृश्य में विशेष रूप से ज्योतिसर क्षेत्र को दर्शाया गया, जो अब कुरुक्षेत्र का प्रमुख तीर्थ स्थल है।
कुरुक्षेत्र को धार्मिक इतिहास के पन्नों में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है और वहाँ का वातावरण हरियाणा की आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक है। इसे इस झांकी में अद्वितीय रूप से प्रस्तुत किया गया था, जिसमें भगवान कृष्ण का दिव्य ज्ञान अर्जुन के लिए एक मार्गदर्शक का कार्य कर रहा था। यह दृश्य दर्शकों को न सिर्फ धार्मिक प्रेरणा देता है बल्कि उनकी आध्यात्मिक दृष्टि को भी प्रबुद्ध करता है।
हरियाणा की सांस्कृतिक समृद्धि और शिल्प कौशल:
झांकी के मध्य भाग में हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत का एक सुंदर प्रस्तुतीकरण किया गया। इस हिस्से में सूरजकुंड मेले की आकर्षक झलक थी, जिसमें विभिन्न पारंपरिक हस्तशिल्प को प्रस्तुत किया गया। सूरजकुंड मेला विश्वभर में प्रसिद्ध है और यह हरियाणा के शिल्पकारों द्वारा बनाए गए कारीगरी के अद्वितीय नमूने पेश करता है।
सूरजकुंड मेला की शिल्प गाड़ी को दर्शाया गया, जिसमें सरकंडा शिल्प, चमड़े की जूतियां, फुलकारी, रेवाड़ी के पीतल के बर्तन और सुराही जैसे पारंपरिक हस्तशिल्प शामिल थे। ये पारंपरिक शिल्प ना केवल हरियाणा की कला और कारीगरी के प्रति सम्मान प्रदर्शित करते हैं, बल्कि राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर की भी गवाह हैं। हरियाणा का यह हिस्सा दर्शकों को राज्य के विविध सांस्कृतिक एवं कारीगरी के रंगों से परिचित कराता है और इसके अद्भुत हुनर के प्रति सम्मान जागृत करता है।
खेल महाशक्ति के रूप में हरियाणा:
झांकी के अंतिम हिस्से में हरियाणा के खेल क्षेत्र में योगदान को अत्यंत प्रभावी तरीके से प्रदर्शित किया गया था। यह भाग पूरी दुनिया को यह संदेश देने का एक सशक्त माध्यम बना कि हरियाणा न केवल भारतीय खेल क्षेत्र में बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी एक महाशक्ति के रूप में उभरा है। हरियाणा को ओलंपिक और राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के 30 प्रतिशत से अधिक पदकों का योगदान देने के रूप में प्रस्तुत किया गया।
हरियाणा राज्य के एथलीटों की मेहनत और समर्पण की पराकाष्ठा ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है। राज्य ने हाल ही में 16 ओलंपिक और पैरालंपिक पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। झांकी ने इस विशेष पहलू को दर्शाते हुए हरियाणा के खेल क्षेत्र की बेजोड़ सफलता को सहेजने का कार्य किया।
राज्य के विभिन्न क्रीड़ाओं जैसे कुश्ती, हॉकी और कबड्डी में प्राप्त असाधारण उपलब्धियां स्पष्ट करती हैं कि कैसे हरियाणा एक शक्ति केंद्र बन चुका है जहां से विश्व स्तर के खिलाड़ी निकलते हैं। इस खेल भाग को देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए और हरियाणा के खेल क्षेत्र के प्रति उनके दिल में नया आदर जगा।
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और महिला सशक्तिकरण:
झांकी के एक और महत्वपूर्ण हिस्से ने हरियाणा की महिला सशक्तिकरण और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की भी गहरी छाप छोड़ी। यह अभियान महिलाओं के संरक्षण और उनके शिक्षा के अधिकार के प्रचार-प्रसार को केंद्रित करता है। हरियाणा ने इस पहल के माध्यम से राज्य में बेटियों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है और उन्होंने देशभर में एक संदेश दिया है कि बेटियां किसी भी कार्य में पीछे नहीं रहतीं, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं।
झांकी ने प्रदेश में महिलाओं को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने के कई उदाहरण प्रस्तुत किए। यहाँ पर महिलाओं की सफलता की कई प्रमुख कहानियाँ गुम्फित थीं, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में अपने कौशल से साबित कर दिया कि समाज के सभी पहलुओं में महिलाएं समान रूप से योगदान देने की क्षमता रखती हैं। यह संदेश विशेष रूप से उन क्षेत्रों में प्रभावी था, जहाँ पर ऐतिहासिक रूप से महिलाओं के लिए अवसर सीमित थे।
हरियाणा की समृद्ध औद्योगिक प्रगति:
हरियाणा की गणतंत्र दिवस झांकी में औद्योगिक प्रगति को भी गहरे ध्यान से प्रदर्शित किया गया। राज्य ने हाल ही में औद्योगिक क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किए हैं और प्रदेश एक प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में उभरा है। यहाँ के उत्पादन, व्यापार और सेवाएँ लगातार बढ़ रही हैं, और राज्य के किसान से लेकर नौकरीपेशा तक हर कोई इन सकारात्मक बदलावों से लाभान्वित हो रहा है।
राज्य में भव्य इंडस्ट्रियल पार्कों और फैक्ट्रियों का तेजी से विस्तार हो रहा है। कृषि उत्पादों के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्रों में उन्नति ने पूरे देश में राज्य को एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। खासतौर पर IT, ऑटोमोबाइल, वस्त्र, और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में राज्य ने उच्चतम स्तर पर प्रगति की है।
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निष्कर्ष:
हरियाणा की झांकी ने गणतंत्र दिवस 2025 पर अपनी सांस्कृतिक और औद्योगिक पहचान का अद्वितीय प्रदर्शन किया। इस झांकी ने न केवल राज्य की ऐतिहासिक धरोहर, खेल क्षेत्र की उत्कृष्टता, और औद्योगिक प्रगति को प्रस्तुत किया, बल्कि महिला सशक्तिकरण जैसे सामाजिक मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। यह झांकी दर्शकों के बीच राज्य की अद्वितीयता और राष्ट्र के प्रति योगदान के प्रति गर्व और प्रेरणा का संचार करने में पूरी तरह सफल रही।
हरियाणा का यह योगदान राष्ट्र निर्माण में न केवल मजबूत योगदान के रूप में जाँचा जाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बनकर रहेगा। गणतंत्र दिवस की इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि हरियाणा केवल कृषि क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि औद्योगिक, खेल, और सामाजिक क्षेत्रों में भी एक विजयी राज्य के रूप में स्थापित हो चुका है।
