रोहतक धर्मांतरण विवाद: पुलिस जांच के घेरे में आरोप और प्रत्यारोप
हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया और आरोपों का सिलसिला जारी, आयोजकों ने शांति भंग करने का लगाया आरोप
रोहतक के गोहाना रोड पर 25 दिसंबर को यीशु के जन्मदिन पर हुए एक कार्यक्रम में कथित धर्मांतरण के आरोप ने विवाद का रूप ले लिया। इस विवाद में पुलिस को जांच शुरू करनी पड़ी है। कार्यक्रम के आयोजकों की शिकायत के बाद हिंदू संगठनों के सदस्य थाने पहुंचे और अपना पक्ष रखा।
शिकायत और हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया
हिंदू संगठनों, जिनमें बजरंग दल, आरएसएस, और अन्य समूह शामिल हैं, ने दावा किया कि उनकी ओर से कोई हिंसक कार्य नहीं हुआ। उनका कहना है कि वे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, जहां गोहाना रोड स्थित शिव धर्मशाला में धर्मांतरण का आरोप था। संगठनों के अनुसार, उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और केवल “धार्मिक सच्चाई” का समर्थन किया।
बजरंग दल के सदस्य रोहित और सुषमा ने बताया, “हमने केवल यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि वहां कोई जबरन धर्मांतरण न हो। हमने बीमार लोगों के लिए प्रार्थनाओं और धार्मिक कार्यों का विरोध किया। हालांकि, हमें यह पता चला कि हमारे खिलाफ पुलिस में शिकायत दी गई है।”
पुलिस कार्रवाई: शिकायतों की जांच जारी
कार्यक्रम के आयोजकों ने दावा किया है कि 25 दिसंबर को उनकी सभा में हंगामा किया गया। आयोजक राकेश राणा, जो मसीह समाज से जुड़े हैं, ने कहा, “हम हर साल प्रभु यीशु के जन्मदिन का कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इस बार, बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों ने न केवल हमारे मेहमानों को परेशान किया, बल्कि कार्यक्रम बंद भी करवा दिया। कुर्सियां इधर-उधर फेंकी गईं और खाना बर्बाद किया गया।”
थाना प्रभारी रवींद्र कुमार ने बताया, “कार्यक्रम आयोजकों की शिकायत के आधार पर हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों को रविवार को बुलाया गया। उन्होंने लिखित में अपना पक्ष रखा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।”
विवाद का आरंभ: कथित धर्मांतरण का मुद्दा
हिंदू संगठनों का कहना है कि कार्यक्रम में धर्मांतरण करवाने का प्रयास हो रहा था। बजरंग दल की टीम ने इस बात की सूचना मिलने पर धर्मशाला का दौरा किया। “हमने वहां किसी पर दबाव नहीं डाला। बस शांति बनाए रखने की अपील की।” संगठन के सदस्यों ने कहा। वहीं, आयोजकों ने इसे स्पष्ट रूप से झूठा आरोप करार दिया।
घटनास्थल की तस्वीर: शांति या हंगामा?
घटनास्थल पर उपस्थित लोगों के अलग-अलग बयान सामने आए। एक गवाह ने बताया कि हिंदू संगठनों ने शोर-शराबा किया और कार्यक्रम के संचालन में बाधा डाली। वहीं, एक अन्य ने कहा कि “कोई शारीरिक हिंसा नहीं हुई, पर माहौल तनावपूर्ण था।”
कार्यक्रम के आयोजकों का पक्ष
मसीह समाज से जुड़े राकेश राणा ने अपनी शिकायत में बताया कि यह कार्यक्रम पिछले पांच वर्षों से आयोजित किया जा रहा है। इस बार पहली बार ऐसा हुआ कि किसी संगठन ने इसे बंद कराने की कोशिश की। उनका कहना है कि आयोजकों ने पुलिस से निष्पक्ष जांच और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
हिंदू संगठनों का बचाव
हिंदू संगठनों का कहना है कि उन्होंने शांति बनाए रखी और केवल धर्मांतरण के मुद्दे पर प्रकाश डाला। सुषमा ने कहा, “यह मामला धार्मिक आस्थाओं का है। हमने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया, पर आयोजकों द्वारा हमें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।”
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पुलिस की जांच और अगला कदम
पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतें दर्ज कर ली हैं और अब सबूतों का संकलन किया जा रहा है। थाना प्रभारी रवींद्र कुमार ने कहा कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले गहन जांच की आवश्यकता होगी। पुलिस ने घटनास्थल की स्थिति का निरीक्षण भी किया है।
प्रशासनिक चेतावनी
प्रशासन ने सभी समुदायों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और कानून-व्यवस्था के लिए सहयोग करें। अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि किसी भी समुदाय को कानूनी प्रक्रिया से ऊपर नहीं रखा जाएगा।
उपसंहार: धार्मिक स्वतंत्रता और सामूहिक शांति
यह घटना रोहतक में धार्मिक संवेदनशीलता और विभिन्न समुदायों के बीच बढ़ते तनाव की ओर इशारा करती है। धर्मांतरण के आरोप और प्रतिक्रियाएं एक जटिल मुद्दा बन गई हैं।
आने वाले दिनों में पुलिस की जांच इस बात को स्पष्ट करेगी कि क्या वाकई धर्मांतरण के प्रयास हो रहे थे या यह केवल एक सांस्कृतिक-सामाजिक विवाद था। इस बीच, समुदायों के बीच आपसी सम्मान और शांति बनाए रखने की दिशा में प्रयास आवश्यक होंगे।
