हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 की तैयारियों के बीच, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को एक और बड़ा झटका लगा है। बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष संतोष यादव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में पार्टी के प्रति निष्ठा और समर्पण का उल्लेख किया, लेकिन साथ ही पार्टी के अंदरूनी हालात पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका इस्तीफा बीजेपी के लिए एक बड़े संकट का संकेत है, खासकर तब जब चुनाव सिर पर हैं और पार्टी को एकजुटता की आवश्यकता है।
“कार्यकर्ताओं को किया दरकिनार, काम न करने वालों को मिली प्राथमिकता”
संतोष यादव ने अपने इस्तीफे में स्पष्ट रूप से लिखा कि उन्होंने हर परिस्थिति में पार्टी के सिद्धांतों और नीतियों का पालन करते हुए निष्ठा से काम किया। लेकिन उन्होंने इस बात पर गहरा दुख जताया कि पार्टी ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की है। संतोष ने कहा, “पार्टी के अंदर विशेष रूप से उन कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है जिन्होंने पार्टी को सशक्त बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके विपरीत, उन व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिन्होंने न तो पार्टी के लिए काम किया और न ही अपने विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों के लिए।”
“पार्टी झुकी व्यक्ति विशेष के अहंकार के आगे”
संतोष यादव ने अपने इस्तीफे में यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी अब व्यक्ति विशेष के अहंकार के आगे झुक गई है, जिससे पार्टी के लोकतांत्रिक मूल्यों और सिद्धांतों पर गंभीर आघात लगा है। उन्होंने लिखा, “मुझे अत्यधिक कष्ट के साथ ये स्वीकार करना पड़ रहा है कि पार्टी के वर्तमान हालात को देखते हुए, मेरे लिए अपनी निष्ठा और आत्मसम्मान के साथ आगे काम करना संभव नहीं है। इसी कारण, मैं बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता समेत अपने सभी पदों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रही हूं।”
टिकट बंटवारे पर संतोष की नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक, संतोष यादव अटेली विधानसभा सीट से टिकट मांग रही थीं, लेकिन बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की बेटी आरती को चुनावी मैदान में उतार दिया। इसे लेकर संतोष यादव बेहद नाराज थीं। उनका मानना था कि पार्टी ने उन कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया है जिन्होंने वर्षों से पार्टी के लिए काम किया, जबकि आरती सिंह को बिना किसी पार्टी के अनुभव के टिकट दे दिया गया।
बीजेपी की दूसरी लिस्ट और उठते सवाल
हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने मंगलवार को अपनी दूसरी लिस्ट जारी की, जिसमें कुल 21 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। इस सूची में दो मंत्रियों का टिकट काटा गया है, जिनमें बड़खल से मौजूदा विधायक और शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा और बवाल से जनस्वास्थ्य मंत्री डॉ. बनवारी लाल का नाम शामिल है। बीजेपी ने बड़खल में सीमा त्रिखा की जगह धनेश अदलखा को टिकट दिया है, जबकि बवाल में डॉ. कृष्ण कुमार को चुनावी मैदान में उतारा गया है। इसके पहले बीजेपी ने अपनी पहली लिस्ट में 67 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया था।
इस्तीफों का दौर शुरू, पार्टी में असंतोष
बीजेपी की दूसरी सूची जारी होने के बाद से ही पार्टी में इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है। संतोष यादव से पहले भी कुछ नेताओं ने टिकट न मिलने के कारण पार्टी से नाराजगी जताई थी। ऐसे में पार्टी के अंदर असंतोष और बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। बीजेपी के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय है, खासकर तब जब पार्टी को चुनाव में हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करनी है।
“पार्टी के प्रति समर्पण सदैव अविचल रहा”: संतोष यादव का इस्तीफा पत्र
अपने इस्तीफे में संतोष यादव ने लिखा, “भारतीय जनता पार्टी के प्रति मेरा समर्पण सदैव अविचल रहा है। मैंने हर परिस्थिति में पार्टी के सिद्धांतों एवं नीतियों का पालन करते हुए काम किया है। लेकिन पार्टी के अंदर ऐसे कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है जिन्होंने पार्टी को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं में निराशा एवं असंतोष फैल रहा है।”
कांग्रेस की ओर से भी राजनीतिक उठापटक जारी
इस बीच, दूसरी ओर, रादौर विधानसभा क्षेत्र से आने वाले कांग्रेस नेता भीम सिंह राठी ने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया है। वहीं, हरियाणा में 90 विधानसभा सीटों पर 5 अक्टूबर के एक चरण में मतदान होगा और 8 अक्टूबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे।
हरियाणा विधानसभा चुनाव: क्या बीजेपी के लिए बढ़ेगी मुश्किलें?
बीजेपी के लिए यह वक्त काफी मुश्किलों भरा है। पार्टी में चल रही उथल-पुथल और वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे से साफ है कि पार्टी के भीतर गहरा असंतोष पनप रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी कैसे अपने नेताओं को एकजुट रखकर चुनावी मैदान में उतरती है और संतोष यादव जैसे वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे के बाद पार्टी की रणनीति में क्या बदलाव आते हैं।
निष्कर्ष: क्या बीजेपी संभाल पाएगी अपने घर को?
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 से पहले बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे ने पार्टी को अंदर से कमजोर कर दिया है। अब यह देखना होगा कि बीजेपी अपने घर को कैसे संभालती है और अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं में आई निराशा को कैसे दूर करती है। पार्टी के लिए यह एक अग्निपरीक्षा की तरह है, जिसमें उसे जीत हासिल करनी है।
इस बार का चुनावी माहौल कुछ अलग ही रंग दिखा रहा है। क्या बीजेपी इस चुनौती से पार पा सकेगी या फिर इसे अपने ही नेताओं के असंतोष का खामियाजा भुगतना पड़ेगा? इसका जवाब तो 8 अक्टूबर को ही मिलेगा, जब नतीजे सामने आएंगे।
