सरकार ने दी 70% तक राहत… फिर भी मंडियों में अटका गेहूं! आखिर क्यों नहीं उठ पा रही किसानों की फसल? जानिए करनाल से ग्राउंड रिपोर्ट।
करनाल। गेहूं उठान धीमा होने की समस्या करनाल की मंडियों में लगातार गंभीर होती जा रही है। प्रदेश सरकार द्वारा 70 प्रतिशत तक लस्टर लॉस की छूट देने के बावजूद भी मंडियों से गेहूं का उठान अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है। इससे किसानों, आढ़तियों और प्रशासन के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, अब तक करनाल जिले की मंडियों में करीब 6.85 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है। इसमें से लगभग 4.04 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद भी की जा चुकी है। हालांकि, खरीद के बाद भी मंडियों से केवल 73 हजार मीट्रिक टन गेहूं का ही उठान हो पाया है, जो कुल खरीदी गई फसल के मुकाबले काफी कम है।
क्या है लस्टर लॉस और क्यों मिली छूट?
लस्टर लॉस का अर्थ है गेहूं के दानों की चमक का कम होना या उनका रंग फीका पड़ जाना। यह स्थिति आमतौर पर बेमौसम बारिश या अधिक नमी के कारण उत्पन्न होती है, जिससे फसल की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
इस बार मौसम की मार झेल रहे किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने 70 प्रतिशत तक लस्टर लॉस की छूट दी है। इसका मतलब है कि खराब गुणवत्ता वाले गेहूं को भी निर्धारित सीमा तक खरीदा जा रहा है, ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।
फिर भी क्यों ‘गेहूं उठान धीमा’?
सरकारी छूट के बावजूद गेहूं उठान धीमा होने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। आढ़तियों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट व्यवस्था इस समय सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
- पर्याप्त संख्या में ट्रक और वाहन उपलब्ध नहीं हैं
- कई ट्रांसपोर्टरों के वाहनों में जीपीएस सिस्टम एक्टिव नहीं है
- बिना जीपीएस के गेट पास जारी नहीं हो पा रहे
- प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी
इन सभी कारणों से मंडियों में खरीदा गया गेहूं लंबे समय तक पड़ा रह रहा है, जिससे जगह की कमी और नई फसल के लिए दिक्कतें बढ़ रही हैं।
किसानों की बढ़ती चिंता
किसानों का कहना है कि उन्हें अपनी फसल बेचने में तो अब राहत मिल रही है, लेकिन गेहूं उठान धीमा से नई फसल को लेकर समस्या खड़ी हो रही है। मंडियों में जगह कम होने से कई किसानों को अपनी उपज लाने में इंतजार करना पड़ रहा है।
एक किसान ने बताया, “सरकार ने खरीद तो कर ली, लेकिन अगर उठान नहीं होगा तो हमें अगली फसल लाने में परेशानी होगी। हमें समय पर खाली जगह चाहिए।”
प्रशासन की सक्रियता, बैठक में दिए निर्देश
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने वीरवार को अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई, जिसमें जिले के सभी एसडीएम, डीएफएससी और खरीद एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मंडियों से गेहूं उठान में तेजी लाई जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अधिकारियों को दिए गए निर्देश
- सभी एसडीएम मंडियों का नियमित निरीक्षण करें
- उठान प्रक्रिया की दैनिक मॉनिटरिंग हो
- ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को मजबूत किया जाए
- जीपीएस सिस्टम को तुरंत एक्टिवेट कराया जाए
- किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो
उपायुक्त ने कहा कि किसानों को उनकी फसल बेचने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए और खरीदी गई फसल का समय पर उठान प्रशासन की प्राथमिकता है।
ट्रांसपोर्ट सिस्टम सबसे बड़ा मुद्दा
इस पूरे मामले में ट्रांसपोर्ट व्यवस्था सबसे कमजोर कड़ी बनकर सामने आई है। कई ट्रांसपोर्टर समय पर वाहन उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं, जबकि कुछ के पास तकनीकी खामियां हैं।
जीपीएस सिस्टम की अनिवार्यता के कारण बिना एक्टिव जीपीएस वाले वाहनों को अनुमति नहीं मिल रही, जिससे उठान प्रक्रिया और धीमी हो गई है।
आर्थिक प्रभाव और जोखिम
अगर यही स्थिति बनी रही, तो इसका असर न केवल किसानों पर बल्कि पूरे सप्लाई चेन पर पड़ेगा। मंडियों में फसल के लंबे समय तक पड़े रहने से गुणवत्ता और खराब हो सकती है, जिससे सरकारी भंडारण और वितरण प्रणाली पर भी दबाव बढ़ेगा।
क्या है समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान बहुस्तरीय होना चाहिए:
- ट्रांसपोर्ट संसाधनों की संख्या बढ़ाई जाए
- जीपीएस सिस्टम को तत्काल अपडेट किया जाए
- मंडियों में अस्थायी भंडारण की व्यवस्था हो
- प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज किया जाए
करनाल बना केस स्टडी
करनाल की स्थिति पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण बन सकती है। अगर यहां उठान प्रक्रिया में सुधार किया जाता है, तो इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है।
लेटेस्ट अपडेट्स और ग्राउंड रिपोर्ट्स के लिए विजिट करें: 9PM News Channel
Facebook – 9pm News Channel
YouTube – 9pm News Channel
