अर्जुन चौटाला के सनसनीखेज आरोप
हरियाणा के रानियां से विधायक अर्जुन चौटाला ने हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के कुलपति बीआर कांबोज पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कुलपति ने महज ₹5000 में ‘स्वामीनाथन अवॉर्ड’ खरीदा और इसका भ्रामक प्रचार किया।
चौटाला का आरोप है कि इस अवॉर्ड की कोई मान्यता नहीं है, क्योंकि इसे एक निजी संस्था ‘एग्रीमीट फाउंडेशन’ द्वारा दिया गया था। असली स्वामीनाथन अवॉर्ड केवल ‘कृषि विज्ञान उन्नति ट्रस्ट, दिल्ली’ द्वारा दिया जाता है, और अब तक सिर्फ 13 लोगों को ही प्राप्त हुआ है। चौटाला का कहना है कि इन 13 लोगों की सूची में एचएयू के कुलपति का नाम शामिल नहीं है।
सरकार और सूचना विभाग भी आए निशाने पर
अर्जुन चौटाला ने इस मामले को और गंभीर बनाते हुए कहा कि हरियाणा की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री भी इस भ्रामक प्रचार का हिस्सा बने। उन्होंने इस अवॉर्ड की सराहना की और सूचना विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर इसकी जानकारी डाल दी। चौटाला ने मुख्यमंत्री से मांग की कि वह इस मामले की जांच करवाएं और कुलपति को तुरंत बर्खास्त करें।
‘फर्जी अवॉर्ड’ से विश्वविद्यालय की साख पर सवाल
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक है, जहां से हर साल हजारों छात्र कृषि के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छूते हैं। लेकिन इस विवाद के बाद विश्वविद्यालय की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अर्जुन चौटाला ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को कुलपति पद पर चार साल का अतिरिक्त कार्यकाल देना गलत संदेश भेजता है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल सरकार और विश्वविद्यालय की छवि खराब होगी, बल्कि छात्रों का भी भविष्य प्रभावित हो सकता है।
‘अन्य विश्वविद्यालयों में भी हो रही गड़बड़ियां’
अर्जुन चौटाला ने हरियाणा सरकार पर शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में कई विश्वविद्यालय ऐसे हैं जहां अयोग्य लोगों को कुलपति बनाया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कुलपति झूठे दस्तावेजों के आधार पर नियुक्त हुए हैं, और सरकार को ऐसे सभी मामलों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एमडी यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस के पेपर लीक हुए। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि सरकार सभी विश्वविद्यालयों की नियुक्तियों पर श्वेत पत्र जारी करे।
कांग्रेस विधायक कादियान का बड़ा आरोप – ‘वीसी भ्रष्ट और तानाशाह’
बेरी से कांग्रेस विधायक रघुबीर कादियान ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया। उन्होंने कुलपति का नाम लिए बिना उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
कादियान ने कहा कि एचएयू के कुलपति भ्रष्ट और तानाशाह हैं और सरकार ने उनके कार्यकाल को बिना किसी ठोस कारण के बढ़ा दिया।
‘कुलपति के दबाव में हुई दिव्या फोगाट की आत्महत्या’
कादियान ने एक और बड़ा आरोप लगाया कि कुलपति की तानाशाही नीतियों के कारण प्रदेश की बेटी दिव्या फोगाट ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रशासन का रवैया बेहद कठोर है और छात्र-छात्राओं को परेशान किया जाता है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि वह एचएयू कुलपति के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच करवाए और यदि आरोप सही साबित होते हैं तो उन्हें तुरंत बर्खास्त किया जाए।
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विधायकों की मांग – ‘सभी विश्वविद्यालयों की हो जांच’
इस पूरे मामले के बाद कई अन्य विधायकों ने भी मांग की कि सभी विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्तियों की समीक्षा हो। उनका कहना था कि यदि किसी कुलपति ने अपनी योग्यता या पुरस्कारों को लेकर झूठ बोला है, तो उन्हें पद से हटाया जाए।
क्या कहती है सरकार?
इस विवाद पर अब तक हरियाणा सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन यदि इस मामले की गूंज तेज होती है तो सरकार को जांच के आदेश देने पड़ सकते हैं।
निष्कर्ष – शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की जरूरत
यह मामला केवल एक अवॉर्ड विवाद का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में व्याप्त अनियमितताओं को उजागर करता है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सवाल उठता है कि क्या शिक्षा संस्थानों में पदों पर बैठे लोग अपनी वास्तविक योग्यता के आधार पर हैं या फिर पैसों और सिफारिशों के दम पर?
अब देखने वाली बात होगी कि क्या सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेती है या फिर यह मामला भी अन्य विवादों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा।
