लेखक: संजय शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार
दिनांक: 26-4-2025
प्रस्तावना: अमेरिका की नजरों से कश्मीर और भारत-पाक विवाद
भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव वैश्विक मंच पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कश्मीर मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच कभी शांति तो कभी संघर्ष की स्थिति बनी रहती है। हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर इस पुराने विवाद को जिंदा कर दिया है। इसी संदर्भ में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
डोनाल्ड ट्रंप का बयान: ‘यह तनाव नया नहीं, सदियों पुराना है’
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए कश्मीर में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। एअरफोर्स वन में यात्रा के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने इस घटना को “बहुत ही बुरा” करार दिया और उम्मीद जताई कि भारत और पाकिस्तान इस मसले को आपसी स्तर पर सुलझा लेंगे।
उन्होंने कहा, “मैं भारत और पाकिस्तान दोनों का मित्र हूं। कश्मीर को लेकर वर्षों से लड़ाई चल रही है। यह कोई नई बात नहीं है। वह सीमा क्षेत्र हमेशा से ही तनावग्रस्त रहा है। लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि दोनों देश मिलकर इसका कोई न कोई हल जरूर निकालेंगे।”
पहलगाम हमला: 20 वर्षों का सबसे भयावह आतंकवादी हमला
मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम क्षेत्र के पास बैसारन घाटी में एक बड़े आतंकी हमले ने पूरे देश को हिला दिया। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई। यह हमला पिछले दो दशकों में कश्मीर में हुआ सबसे घातक हमला माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक यह हमला सुनियोजित था और इसके पीछे सीमापार से मिली साजिश भी सामने आ रही है।
हमले के बाद घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है और एनआईए तथा स्थानीय पुलिस की टीमों ने जांच शुरू कर दी है।
भारत सरकार का तीखा जवाब: कूटनीतिक मोर्चे पर कार्रवाई
पहलगाम हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान के खिलाफ कई अहम कदम उठाए हैं। इनमें शामिल हैं:
- अटारी ICP को अस्थायी रूप से बंद करना: भारत ने पाकिस्तान के साथ लगे अटारी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है जिससे व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ा है।
- सार्क वीजा छूट योजना पर रोक: पाकिस्तान के नागरिकों के लिए लागू विशेष वीजा छूट योजना को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
- उच्चायोग के अधिकारियों की संख्या में कटौती: दोनों देशों के राजनयिकों की संख्या में कटौती की गई है जिससे राजनयिक स्तर पर संवाद सीमित हो गया है।
- सिंधु जल संधि पर पुनर्विचार: भारत ने 1960 में पाकिस्तान के साथ हुई सिंधु जल संधि को भी निलंबित कर दिया है। अब सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि भारत की नदियों का एक भी बूंद पानी व्यर्थ न जाए या पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश न करे।
मोदी-ट्रंप बातचीत: भारत को मिला अमेरिका का समर्थन
हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई जिसमें ट्रंप ने भारत को इस मुश्किल घड़ी में पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया। उन्होंने इस हमले को ‘जघन्य’ बताया और कहा कि अमेरिका भारत के साथ खड़ा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि हमले के दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने के लिए अमेरिका हर संभव सहायता देने को तैयार है।
भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में फिर तनाव
पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से तनावपूर्ण रिश्तों में और अधिक तल्खी आ गई है। दोनों देशों की सीमाओं पर सैन्य गतिविधियाँ तेज हो गई हैं और कूटनीतिक संपर्क लगभग ठप हो गया है। पाकिस्तान की ओर से इस हमले पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन भारत की ओर से दो टूक संदेश दिया गया है कि आतंकवाद को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अमेरिका की संतुलित भूमिका: बीच का रास्ता या रणनीति?
डोनाल्ड ट्रंप का बयान यह दर्शाता है कि अमेरिका इस मुद्दे पर किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं करता बल्कि दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण समाधान चाहता है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता का संकेत दिया हो, लेकिन भारत हमेशा से इस मुद्दे को द्विपक्षीय मानता आया है और किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को अस्वीकार करता रहा है।
कश्मीर: एक स्थायी समाधान की जरूरत
कश्मीर मुद्दे को लेकर दशकों से चल रहा तनाव केवल भारत और पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि पूरी दक्षिण एशियाई स्थिरता के लिए खतरा बना हुआ है। आए दिन होने वाले आतंकी हमले, सीमा पर गोलीबारी और कूटनीतिक विवाद इस क्षेत्र की प्रगति में बाधा डालते हैं। भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने साफ कर दिया है कि कश्मीर में शांति बहाल करने के लिए अब हर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
निष्कर्ष: क्या अब निर्णायक मोड़ पर है भारत-पाक संबंध?
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने जिस प्रकार कूटनीतिक और सामरिक रूप से आक्रामक नीति अपनाई है, वह दर्शाता है कि अब आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर अमल हो रहा है। वहीं, अमेरिका सहित दुनिया के अन्य देश भी अब इस क्षेत्र में शांति और स्थायित्व की आवश्यकता को गंभीरता से समझने लगे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत-पाक रिश्तों की दिशा को लेकर चिंतित है। अब यह दोनों देशों की जिम्मेदारी है कि वे मिलकर इस पुरानी लड़ाई का स्थायी हल तलाशें।
