‘अगर कप्तान नहीं होते तो बाहर होते’ – इरफान पठान ने खोला सिडनी टेस्ट का राज, रोहित शर्मा टेस्ट संन्यास से पहले की पूरी कहानी
रोहित शर्मा टेस्ट संन्यास की खबर ने भारतीय क्रिकेट जगत को झकझोर दिया। ‘हिटमैन’ के नाम से मशहूर इस दिग्गज बल्लेबाज ने 7 मई 2025 को टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहने का ऐलान किया। टी20 अंतरराष्ट्रीय को पहले ही छोड़ चुके रोहित अब सिर्फ वनडे क्रिकेट में भारतीय टीम के लिए उपलब्ध रहेंगे। लेकिन इस फैसले से जुड़ी कहानी महज एक प्रेस रिलीज़ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक लंबा सफर, संघर्ष और आलोचना का दौर भी है।
जनवरी 2025 – ऑस्ट्रेलिया दौरे से उठी संन्यास की आहट
जनवरी 2025 में टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थी। यह दौरा तीन टेस्ट मैचों का था, लेकिन रोहित शर्मा का बल्ला इस सीरीज में पूरी तरह खामोश रहा। तीन मैचों में उन्होंने महज़ 31 रन बनाए, वह भी 6.20 के बेहद खराब औसत से। ऐसे में तीसरे और आखिरी मैच, यानी सिडनी टेस्ट से पहले रोहित शर्मा ने खुद को टीम से बाहर रखने का फैसला किया।
इस निर्णय ने क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए। क्या रोहित मानसिक दबाव में थे? क्या रोहित शर्मा की कप्तानी पर सवाल उठ रहे थे? और क्या यह उनके टेस्ट करियर का अंत होने जा रहा था?
सिडनी टेस्ट – जब इरफान पठान ने लिया इंटरव्यू
सिडनी टेस्ट के दूसरे दिन एक दिलचस्प वाकया हुआ। ब्रॉडकास्टर्स ने टीम इंडिया के पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान को स्टूडियो से मैदान पर भेजा, जहां उन्होंने रोहित शर्मा का इंटरव्यू लिया।
बाद में, लल्लनटॉप को दिए एक इंटरव्यू में इरफान पठान ने इस घटना के बारे में खुलासा किया। उन्होंने कहा –
“रोहित व्हाइट बॉल क्रिकेट के शानदार खिलाड़ी हैं, लेकिन उस दौरे पर उनका टेस्ट औसत सिर्फ 6 था। अगर वो कप्तान नहीं होते, तो टीम में उनकी जगह नहीं होती।”
इरफान ने आगे बताया कि इंटरव्यू के दौरान उन्होंने रोहित से सख्त सवाल करने के बजाय एक मेहमान के तौर पर उनका सम्मान किया, क्योंकि टीवी चैनल पर आने वाले किसी भी खिलाड़ी के साथ ऐसा ही किया जाना चाहिए। लेकिन इस विनम्रता को लोगों ने समर्थन समझ लिया।
इरफान का समर्थन या पेशेवर शालीनता?
इरफान पठान ने साफ किया कि उनका इरादा किसी खिलाड़ी का बचाव करना नहीं था।
“जब कोई आपके चैनल पर इंटरव्यू देने आता है, तो आप उसके साथ दुर्व्यवहार नहीं कर सकते। आपने उन्हें बुलाया है, इसलिए आप सम्मान देंगे। रोहित को लेकर हमने ये भी कहा था कि वो मेहनत करते रहें, लेकिन उनके प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलनी चाहिए थी। अगर वो कप्तान नहीं होते, तो टीम से बाहर कर दिए जाते।”
इस बयान ने सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलकर चर्चा का माहौल बना दिया। कई लोगों ने इसे ईमानदार क्रिकेट विश्लेषण कहा, जबकि कुछ ने इसे रोहित के लिए कठोर शब्दों के रूप में देखा।
संन्यास का ऐलान – इंग्लैंड सीरीज से पहले का फैसला
दिलचस्प बात यह है कि उस इंटरव्यू में रोहित शर्मा ने खुद कहा था कि वे अभी टेस्ट क्रिकेट से संन्यास नहीं लेने जा रहे हैं। लेकिन इंग्लैंड सीरीज से ठीक पहले उन्होंने अचानक यह घोषणा कर दी कि वह अब टेस्ट क्रिकेट में नहीं खेलेंगे।
इस खबर ने फैंस को चौंका दिया। जो खिलाड़ी कुछ महीने पहले कह रहा था कि वह संन्यास का सोच भी नहीं रहा, उसने अचानक यह कदम क्यों उठा लिया? क्या इसके पीछे शारीरिक थकान, बढ़ती उम्र, या खराब फॉर्म का दबाव था?
ऑस्ट्रेलिया दौरा – करियर का आखिरी टेस्ट टूर
ऑस्ट्रेलिया का यह दौरा रोहित शर्मा के टेस्ट करियर का आखिरी टूर साबित हुआ। हालांकि उनके वनडे और टी20 रिकॉर्ड जगमगाते हैं, लेकिन टेस्ट में यह दौरा उनके लिए एक निराशाजनक अंत था।
कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इस दौर में कप्तानी का अतिरिक्त दबाव, लगातार यात्रा, और बढ़ती उम्र का असर उनके खेल पर साफ दिख रहा था।
रोहित शर्मा का टेस्ट सफर – एक नजर में
- डेब्यू: नवंबर 2013, वेस्टइंडीज के खिलाफ
- कुल टेस्ट मैच: 67
- कुल रन: 4301
- औसत: 40.57
- शतक: 12
- अर्धशतक: 18
- सर्वोच्च स्कोर: 212 (साउथ अफ्रीका के खिलाफ, 2019)
रोहित ने टेस्ट क्रिकेट में ओपनर के रूप में नई पहचान बनाई, खासकर 2019 के बाद। उनकी बल्लेबाजी में क्लास, टाइमिंग और बड़े शॉट खेलने की क्षमता ने उन्हें ‘हिटमैन’ की पहचान दी, लेकिन लंबी फॉर्मेट में निरंतरता हमेशा उनके करियर की चुनौती रही।
संन्यास के बाद विराट कोहली का फैसला
रोहित के संन्यास लेने के कुछ ही दिनों बाद पूर्व कप्तान विराट कोहली ने भी टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया। यह भारतीय क्रिकेट के लिए एक युग के अंत जैसा था – दो बड़े नाम, जिन्होंने पिछले दशक में टीम को कई बड़ी जीत दिलाई, अब सबसे लंबे फॉर्मेट में नहीं दिखेंगे।
फैंस की प्रतिक्रिया – सोशल मीडिया में बंटा माहौल
संन्यास की खबर के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की राय सामने आई। एक ओर, लाखों फैंस ने रोहित के करियर को सलाम किया और उनकी सेवाओं के लिए धन्यवाद दिया। दूसरी ओर, कुछ ने यह भी कहा कि उन्हें पहले ही टेस्ट क्रिकेट से अलग हो जाना चाहिए था, ताकि युवा खिलाड़ियों को मौका मिल सके।
क्या वाकई कप्तानी ने बचाई थी जगह?
इरफान पठान का बयान “अगर कप्तान नहीं होते तो बाहर होते” एक गंभीर क्रिकेटिंग बहस को जन्म देता है। क्रिकेट में यह कोई नई बात नहीं है कि कप्तान का खराब फॉर्म भी टीम में उनकी जगह को बरकरार रखता है। लेकिन यह सवाल हमेशा विवादित रहा है कि क्या चयनकर्ता कप्तान के प्रदर्शन पर उतनी ही सख्ती से सवाल उठाते हैं, जितना बाकी खिलाड़ियों पर?
भविष्य – वनडे पर फोकस और मेंटर की भूमिका
अब रोहित शर्मा का पूरा ध्यान वनडे क्रिकेट पर होगा, जहां वह 2025 चैंपियंस ट्रॉफी और 2027 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की योजनाओं का अहम हिस्सा रह सकते हैं। इसके अलावा, उम्मीद है कि वह युवा खिलाड़ियों के मेंटर के रूप में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
निष्कर्ष
रोहित शर्मा का टेस्ट करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा – शानदार पारियां, कप्तानी का गौरव, लेकिन साथ ही आलोचना और दबाव भी। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर इरफान पठान के इंटरव्यू से लेकर इंग्लैंड सीरीज से पहले अचानक संन्यास तक, यह कहानी सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि इंसानी जज़्बात, पेशेवर दबाव और खेल की सच्चाई का आईना है।
