भारतीय युवा बल्लेबाज़ Yashasvi Jaiswal एजबेस्टन टेस्ट रिकॉर्ड में एक नया अध्याय जोड़ चुके हैं। इंग्लैंड के खिलाफ बर्मिंघम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन यशस्वी ने 87 रनों की पारी खेलकर 51 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। उनकी यह पारी न केवल तकनीकी रूप से मजबूत रही, बल्कि मानसिक दृढ़ता और परिपक्वता की मिसाल भी थी।
इतिहास रचने वाली पारी
23 वर्षीय बाएं हाथ के बल्लेबाज़ Yashasvi Jaiswal ने एजबेस्टन की मुश्किल पिच पर 107 गेंदों में 13 चौकों की मदद से 87 रन बनाए। उनकी यह पारी टीम इंडिया के लिए संजीवनी बूटी की तरह थी, खासकर तब, जब टीम लीड्स में पिछले टेस्ट में 5 विकेट से हार के बाद दबाव में थी।
उन्हें लंच के बाद के सत्र में इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने पवेलियन भेजा, लेकिन तब तक वे भारतीय टेस्ट इतिहास के पन्नों में नाम दर्ज करा चुके थे।
51 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा
एजबेस्टन में भारतीय ओपनर द्वारा इससे पहले सर्वोच्च स्कोर का रिकॉर्ड सुधीर नाइक के नाम था, जिन्होंने जुलाई 1974 में 165 गेंदों में 77 रन बनाए थे।
बर्मिंघम टेस्ट में भारतीय ओपनर्स द्वारा बनाए गए टॉप 5 स्कोर इस प्रकार हैं:
| बल्लेबाज़ | स्कोर | वर्ष |
|---|---|---|
| यशस्वी जायसवाल | 87 | 2025 |
| सुधीर नाइक | 77 | 1974 |
| सुनील गावस्कर | 68 | 1979 |
| चेतेश्वर पुजारा | 66 | 2022 |
| सुनील गावस्कर | 61 | 1979 |
पारी में दिखाई रणनीति और धैर्य
Yashasvi Jaiswal की बल्लेबाज़ी में वह रणनीति दिखी, जो बड़े खिलाड़ियों की निशानी होती है। उन्होंने न केवल खराब गेंदों को बाउंड्री के बाहर भेजा, बल्कि अच्छे गेंदबाज़ों के खिलाफ संयम भी दिखाया। शुरुआत में इंग्लिश गेंदबाज़ों ने स्विंग और सीम मूवमेंट से उन्हें परेशान करने की कोशिश की, लेकिन जायसवाल ने अपना संतुलन नहीं खोया।
2000 रन क्लब के करीब
Yashasvi Jaiswal टेस्ट क्रिकेट में भारत के सबसे तेज़ 2000 रन पूरे करने वाले बल्लेबाज़ बनने के करीब पहुंच गए हैं। फिलहाल उनके पास 40 पारियों में 1990 रन हैं। अगर वे दूसरी पारी में 10 रन और बना लेते हैं, तो वे वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ की बराबरी कर लेंगे, जिन्होंने 40 पारियों में यह उपलब्धि हासिल की थी।
पहले टेस्ट में भी जड़े थे शतक
Yashasvi Jaiswal की फॉर्म का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले टेस्ट मैच में भी उन्होंने 159 गेंदों में 16 चौकों और 1 छक्के की मदद से 101 रनों की शानदार पारी खेली थी। उस मैच में भी उन्हें बेन स्टोक्स ने आउट किया था।
हालांकि दूसरी पारी में वे केवल 4 रन बनाकर ब्रायडन कार्स की गेंद पर आउट हो गए थे।
फील्डिंग बनी चुनौती
लीड्स टेस्ट के दौरान Yashasvi Jaiswal से चार कैच छूटे, जिनका सीधा असर मैच के नतीजे पर पड़ा। इस कारण से उनकी फील्डिंग को लेकर भी सवाल उठे। एजबेस्टन टेस्ट में उन्होंने इस मोर्चे पर भी सुधार के संकेत दिए हैं। वे जान चुके हैं कि एक सफल क्रिकेटर के लिए केवल बल्लेबाज़ी ही नहीं, बल्कि फील्डिंग में भी परिपूर्णता ज़रूरी है।
टीम इंडिया की प्लेइंग 11 – एजबेस्टन टेस्ट (2025)
- यशस्वी जायसवाल
- केएल राहुल
- करुण नायर
- शुभमन गिल (कप्तान)
- ऋषभ पंत (विकेटकीपर)
- नीतीश कुमार रेड्डी
- रवींद्र जडेजा
- वॉशिंगटन सुंदर
- आकाश दीप
- मोहम्मद सिराज
- प्रसिद्ध कृष्णा
इंग्लैंड की प्लेइंग 11 – एजबेस्टन टेस्ट (2025)
- जैक क्राउली
- बेन डकेट
- ओली पोप
- जो रूट
- हैरी ब्रूक
- बेन स्टोक्स (कप्तान)
- जेमी स्मिथ (विकेटकीपर)
- क्रिस वोक्स
- ब्रायडन कार्स
- जोश टंग
- शोएब बशीर
क्यों है यह पारी खास?
यशस्वी की पारी केवल एक स्कोर नहीं थी, यह एक बयान थी। इस बयान में एक युवा खिलाड़ी की कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और भारतीय क्रिकेट के उज्ज्वल भविष्य की गूंज थी।
इस पारी ने यह भी बताया कि क्यों यशस्वी को भारत की अगली बड़ी बल्लेबाज़ी उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है। वो न केवल घरेलू क्रिकेट में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खुद को साबित कर रहे हैं।
क्रिकेट विशेषज्ञों की राय
पूर्व दिग्गज बल्लेबाज़ सुनील गावस्कर ने उनकी पारी की तारीफ करते हुए कहा, “यशस्वी ने मुश्किल परिस्थितियों में जिस तरह से बल्लेबाज़ी की, वह प्रशंसनीय है। अगर वे इस तरह निरंतर प्रदर्शन करते रहे, तो भारत को एक लंबा समय तक सलामी बल्लेबाज़ की समस्या नहीं रहेगी।”
निष्कर्ष
यशस्वी जायसवाल की यह पारी आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक प्रेरणास्पद अध्याय के रूप में याद रखी जाएगी। उन्होंने साबित किया कि एक खिलाड़ी का जुनून, अभ्यास और आत्मविश्वास ही उसे रिकॉर्ड बुक्स में जगह दिला सकता है।
अब जब उनकी नजरें टेस्ट में 2000 रन क्लब में शामिल होने पर हैं, तब दुनिया की निगाहें भी उन पर टिकी हैं। क्रिकेटप्रेमियों को उम्मीद है कि यशस्वी भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
