कर्ण गेट बाजार अतिक्रमण: नगर निगम की सख्ती से भड़के अस्थाई दुकानदार, हंगामा और हिरासत के बाद बढ़ा तनाव

कर्ण गेट बाजार अतिक्रमण: नगर निगम की सख्ती से भड़के अस्थाई दुकानदार, हंगामा और हिरासत के बाद बढ़ा तनाव
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करनाल के कर्ण गेट बाजार अतिक्रमण को लेकर रविवार को नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस की संयुक्त कार्रवाई एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई। जहां प्रशासन अतिक्रमण हटाने को जरूरी बता रहा है, वहीं अस्थाई दुकानदारों का गुस्सा इस कार्रवाई को लेकर फूट पड़ा। निगम की टीम द्वारा करीब 12 रेहड़ी-पटरी वालों का सामान जब्त किए जाने के बाद अस्थाई दुकानदारों ने जोरदार विरोध किया, जिससे बाजार में तनावपूर्ण माहौल बन गया।

बाजार में संडे को फिर गरमा गया कर्ण गेट बाजार अतिक्रमण विवाद

नगर निगम की टीम लगातार दूसरे रविवार कर्ण गेट क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण हटाने पहुंची। विशेष रूप से संडे मार्केट को निशाने पर लेकर यह कार्रवाई की गई, जिसमें 12 अस्थाई दुकानदारों का सामान जब्त कर लिया गया। मौके पर पहुंचे दुकानदारों ने हंगामा किया और कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई। ट्रैफिक पुलिस ने एक दुकानदार को हिरासत में भी लिया, जिसे बाद में छोड़ दिया गया।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि नगर निगम की यह कार्रवाई केवल छोटे दुकानदारों को निशाना बना रही है, जबकि स्थायी दुकानदारों द्वारा सड़क तक किए गए अतिक्रमण को नजरअंदाज किया जा रहा है।

निगम ने पहले बनाए कार्ड, अब उठा रहा रोज़गार पर सवाल

प्रभावित दुकानदारों का कहना है कि नगर निगम ने ही उन्हें पथ विक्रेता कार्ड उपलब्ध कराए थे और स्वरोज़गार हेतु लोन भी दिलवाया था। ऐसे में अब उन्हीं दुकानदारों के विरुद्ध कार्रवाई कर उनका सामान जब्त करना एकतरफा और अनुचित है।

दुकानदार रमेश कुमार का कहना है, “हम पिछले 15 साल से यहां हर रविवार को बाजार लगाते हैं। हमारे पास निगम के जारी किए गए वैध कार्ड हैं, लोन भी उन्हीं की अनुशंसा पर मिला था। अब अचानक हमें बाजार न लगाने की चेतावनी देना और सामान उठाना हमारी रोज़ी-रोटी पर वार है।”

प्रशासन की सफाई: सड़क और बाजार को बनाना है कर्ण गेट बाजार अतिक्रमण मुक्त

नगर निगम आयुक्त डॉ. वैशाली शर्मा ने कहा कि संडे सेल के नाम पर अव्यवस्थित अतिक्रमण से ट्रैफिक व्यवस्था बाधित होती है और आमजन को परेशानी होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निगम की ओर से बार-बार मुनादी कर चेतावनी दी गई थी कि रविवार को कर्ण गेट में बाजार न लगाया जाए, फिर भी उल्लंघन किया गया।

“हमने नियम तोड़ने वालों का सामान जब्त किया है। दोबारा अतिक्रमण मिलने पर भारी जुर्माना लगेगा। सड़कों और बाजारों को अतिक्रमण मुक्त बनाने का अभियान जारी रहेगा।”डॉ. वैशाली शर्मा, आयुक्त, नगर निगम करनाल

दुकानदार बोले – निगम बड़े दुकानदारों पर चुप क्यों?

अस्थाई दुकानदारों का आरोप है कि नगर निगम की टीम केवल गरीब और कमजोर दुकानदारों को टारगेट कर रही है, जबकि स्थायी दुकानदारों ने अपनी दुकानें दुकान के बाहर तक फैला रखी हैं और ट्रैफिक में रुकावट का कारण बनते हैं। लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती।

दुकानदार मुकेश ने कहा, “हमें छोटा व्यापार चलाकर परिवार पालना है। निगम की टीम केवल हमारी रेहड़ियां उठाकर दिखावा करती है, लेकिन बड़ी दुकानों के बाहर कब्जा बना हुआ है, उस पर कोई कार्रवाई नहीं।”

स्थानीय नागरिकों की भी दोहरी प्रतिक्रिया

इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय नागरिकों की भी मिली-जुली प्रतिक्रिया रही। कुछ लोगों ने इसे सड़क और बाजार की सफाई के लिहाज से सही कदम बताया, तो कुछ ने इसे एकतरफा करार दिया। स्थानीय निवासी मोनिका भाटिया का कहना है, “रविवार को यहां इतनी भीड़ हो जाती है कि पैदल चलना मुश्किल हो जाता है। निगम सही कर रहा है। लेकिन अगर कार्रवाई करनी है तो सभी दुकानों पर होनी चाहिए।”

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आई सामने

कांग्रेस पार्षद प्रतिनिधि वीरेंद्र धीमान ने कहा कि निगम की यह कार्रवाई अस्थाई दुकानदारों के साथ अन्याय है। पहले उन्हें कानूनी रूप से जगह दी जाए, फिर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि “नगर निगम खुद ही लोन दिलवाता है, कार्ड देता है, और अब वही दुकानें उठवा रहा है। यह दोहरा रवैया है।”

क्या है समाधान?

स्थानीय सामाजिक संगठनों और व्यापार मंडल ने सुझाव दिया है कि अस्थाई दुकानदारों के लिए किसी अन्य स्थान पर वैकल्पिक बाजार की व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे ट्रैफिक और अतिक्रमण की समस्या भी सुलझे और छोटे दुकानदारों का रोजगार भी न छिने।

निगम की मंशा या दिखावा? सवाल कायम

सवाल यह भी उठता है कि क्या नगर निगम की यह कार्रवाई वास्तव में शहर को व्यवस्थित बनाने के लिए है या केवल खानापूर्ति। क्योंकि बड़ी दुकानों और प्रतिष्ठानों पर कोई कार्रवाई न होना इस अभियान को सवालों के घेरे में डालता है। जब निगम ने ही पथ विक्रेता कार्ड जारी किए हैं, तो अब उन्हें काम से रोकना कितना न्यायोचित है?

अंत में: एक संतुलन की जरूरत

करनाल का कर्ण गेट बाजार शहर का एक प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है। यहां हर रविवार को अस्थाई दुकानदारों की संडे सेल से हजारों लोगों की आवाजाही होती है। यह सस्ती दरों पर सामान खरीदने का एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन गया है। ऐसे में केवल अतिक्रमण हटाने के नाम पर इन दुकानदारों का रोजगार छीनना न तो व्यावसायिक दृष्टि से उचित है और न ही सामाजिक दृष्टि से।

नगर निगम को चाहिए कि एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाकर सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकाले।

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