भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत कलाबाजी सेलिब्रेशन को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। इंग्लैंड के खिलाफ लीड्स टेस्ट में जब उन्होंने पहली पारी में शानदार शतक जड़ा, तो जश्न मनाने का तरीका भी कुछ अलग ही रहा – उन्होंने मैदान पर ‘कलाबाजी’ (Somersault) कर दी।
यह दृश्य जहां फैंस के लिए रोमांचक था, वहीं उनके सर्जन डॉ. दिनशॉ पारदीवाला को चिंता में डाल गया। बता दें कि डॉ. पारदीवाला वही सर्जन हैं जिन्होंने दिसंबर 2022 में ऋषभ पंत के कार एक्सीडेंट के बाद उनकी घुटने की सर्जरी की थी। अब उन्होंने इस ‘कलाबाजी’ सेलिब्रेशन को लेकर चेतावनी दी है।
शानदार वापसी लेकिन सेलिब्रेशन पर सवाल
लीड्स टेस्ट में ऋषभ पंत ने अपने बल्ले से जलवा बिखेरा। उन्होंने न केवल पहली पारी में 134 रनों की लाजवाब पारी खेली, बल्कि दूसरी पारी में भी 118 रन बनाकर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
इस तरह पंत टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में दोनों पारियों में शतक लगाने वाले दुनिया के केवल दूसरे विकेटकीपर बल्लेबाज बन गए। उनसे पहले यह कारनामा सिर्फ जिम्बाब्वे के पूर्व खिलाड़ी एंडी फ्लावर ने किया था।
जहां पूरा देश पंत की बल्लेबाजी की तारीफ कर रहा था, वहीं उनके ‘कलाबाजी’ सेलिब्रेशन को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों की चिंता सामने आई।
सर्जन की सीधी चेतावनी: “ऐसा सेलिब्रेशन जरूरी नहीं”
पंत के इस स्टाइलिश सेलिब्रेशन पर कोकिलाबेन हॉस्पिटल, मुंबई के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. दिनशॉ पारदीवाला ने एक बड़ी बात कही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की कलाबाजी उनके शरीर, खासकर उनके घुटनों और कमर के लिए खतरनाक हो सकती है।
“इस तरह की मूवमेंट से जोड़ों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। पहले से इंजर्ड हो चुके घुटनों पर एक गलत लैंडिंग सब कुछ बिगाड़ सकती है।”
यानी पंत की एक कलाबाजी उन्हें फिर से लंबे समय के लिए मैदान से बाहर कर सकती है।
डॉ. पारदीवाला: “पंत बहुत लकी हैं जो बच गए”
डॉ. पारदीवाला ने यह भी कहा कि पंत बहुत सौभाग्यशाली रहे कि वह कार एक्सीडेंट में जीवित बच पाए। उन्होंने द टेलीग्राफ से बातचीत में कहा—
“ऋषभ पंत बहुत भाग्यशाली हैं कि वे उस हादसे में जिंदा बच गए। उस तरह के एक्सीडेंट में, जिसमें कार पलट जाए और आग लग जाए, मृत्यु का खतरा बहुत अधिक होता है।”
डॉक्टर के इस बयान से एक बार फिर यह साफ हो जाता है कि पंत को अब अपने शरीर का ध्यान रखना चाहिए, खासकर ऐसे समय में जब वे दोबारा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लौटे हैं।
पंत की सफाई: “मैं बचपन से करता आया हूं ‘कलाबाजी’”
उधर पंत ने इस सेलिब्रेशन पर अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा—
“मेरे पास तीन सेलिब्रेशन ऑप्शन थे—एक तो बल्ले से जवाब देना, दूसरा अपनी स्टाइल दिखाना और तीसरा कुछ हटके करना। मैं बचपन से ‘कलाबाजी’ करता रहा हूं, मैंने स्कूल में जिमनास्टिक सीखा है।”
इस बयान से यह तो साफ है कि पंत का यह मूवमेंट नया नहीं है, लेकिन डॉक्टरों की बात को नज़रअंदाज़ करना भी खतरनाक हो सकता है।
आईपीएल में भी दिखी थी कलाबाजी
इससे पहले आईपीएल 2025 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) के खिलाफ शतक जड़ने के बाद भी पंत ने यही ‘कलाबाजी सेलिब्रेशन’ किया था। हालांकि, वह तब भी अपनी फिटनेस को लेकर डॉक्टरों की निगरानी में थे।
क्या कहते हैं स्पोर्ट्स मेडिसिन एक्सपर्ट?
स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट्स और एक्सपर्ट्स का मानना है कि ‘सॉमरसॉल्ट’ जैसी जिमनास्टिक मूवमेंट्स में स्पाइनल कॉर्ड, नी-जॉइंट और एंकल पर भारी दबाव आता है। यदि यह बिना वार्म-अप या थकावट में किया जाए, तो यह चोट को फिर से सक्रिय कर सकता है।
पंत की वापसी का सफर: दर्द, संघर्ष और प्रेरणा
दिसंबर 2022 में पंत का जीवन एक भयानक मोड़ से गुजरा। उत्तराखंड में हुए एक्सीडेंट में उनकी कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी और उन्हें कई गंभीर चोटें आई थीं।
उनकी सर्जरी और रिकवरी प्रोसेस:
- घुटने के लिगामेंट्स की सर्जरी
- लंबी फिजियोथेरेपी
- मानसिक और शारीरिक पुनर्वास
इस सबके बाद 2025 में उन्होंने क्रिकेट के मैदान पर वापसी की, और अब लीड्स में दो शतक लगाकर आलोचकों को जवाब दे दिया है।
क्या ऋषभ को ‘स्टाइल’ छोड़नी होगी?
यह सवाल अब उठने लगा है—क्या पंत को अपनी ‘स्टाइल’ यानी कलाबाजी छोड़नी होगी? डॉक्टर की चेतावनी, उनके अतीत की गंभीर चोटें और भारत को उनकी जरूरत, इन सब बातों को मिलाकर देखें तो इसका जवाब ‘हां’ में हो सकता है।
फैंस क्या कह रहे हैं?
सोशल मीडिया पर पंत की कलाबाजी को लेकर दो तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं:
- कुछ फैंस इसे ‘पंत स्टाइल’ मानते हैं और इससे उन्हें जोश मिलता है।
- वहीं कुछ का मानना है कि अब उन्हें ‘स्मार्ट क्रिकेट’ खेलनी चाहिए और जोखिम से बचना चाहिए।
निष्कर्ष: क्रिकेट एक खेल नहीं, जिम्मेदारी है
ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ी केवल एक टीम का हिस्सा नहीं होते, बल्कि करोड़ों भारतीयों की उम्मीद होते हैं। उनका हर रन, हर मूवमेंट लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा होता है।
ऐसे में डॉक्टर की चेतावनी को नजरअंदाज करना केवल उनके लिए ही नहीं, भारतीय क्रिकेट के लिए भी जोखिमभरा हो सकता है।
