आज के दौर में नौकरी की तलाश ही नहीं, बल्कि खुद रोजगार देने का सपना भी युवा देख रहे हैं — और इसी सोच को नई दिशा देने के लिए घराैंडा के राजकीय महाविद्यालय में आयोजित NSS शिविर चर्चा का केंद्र बना।
छात्रों को उद्यम के लिए प्रेरित: NSS शिविर में युवाओं को मिला रोजगार और स्टार्टअप का मंत्र
घराैंडा। छात्रों को उद्यम के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से राजकीय महाविद्यालय में चल रहे राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) शिविर के चौथे दिन रोजगार अवसरों और स्टार्टअप संस्कृति पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यातिथि महाबीर नरवाल ने विद्यार्थियों को बदलते दौर के अनुसार खुद को तैयार करने, उद्योगों की खबरों से अपडेट रहने और अपने कौशल को लगातार निखारते रहने की सीख दी। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. सुरेंद्र नागिया सहित शिक्षकों और बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे।
युवाओं को दिया आत्मनिर्भर बनने का संदेश
NSS शिविर का मुख्य उद्देश्य केवल सामाजिक सेवा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छात्रों के भविष्य और करियर निर्माण पर भी गंभीर चर्चा हुई। मुख्यातिथि ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी युग में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। छात्रों को समय-समय पर अपने कौशल का आकलन करना चाहिए और नए अवसरों की खोज करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत में स्टार्टअप संस्कृति तेजी से बढ़ रही है और ऐसे में युवाओं के पास खुद का व्यवसाय शुरू करने के कई अवसर हैं।
उन्होंने छात्रों से कहा कि वे केवल नौकरी के पीछे न भागें, बल्कि अपने अंदर छिपे उद्यमी को पहचानें। छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी बड़े उद्योग का रूप ले सकता है, यदि उसमें मेहनत और सही दिशा हो।
उद्योगों की जानकारी और अपडेट रहने पर जोर
व्याख्यान के दौरान महाबीर नरवाल ने छात्रों को सलाह दी कि वे उद्योगों से जुड़ी खबरों और नई तकनीकों के बारे में लगातार जानकारी जुटाते रहें। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में जानकारी ही सबसे बड़ी ताकत है। जो छात्र उद्योग जगत की बदलती जरूरतों को समझते हैं, वही आगे बढ़ते हैं।
उन्होंने छात्रों को सुझाव दिया कि वे रोजाना कम से कम कुछ समय करियर से जुड़ी वेबसाइट्स, समाचार और स्किल डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म्स पर बिताएं। इससे न केवल उनका ज्ञान बढ़ेगा, बल्कि वे आने वाले अवसरों के लिए तैयार भी रहेंगे।
रिज्यूम अपडेट रखने की दी सीख
कार्यक्रम में छात्रों को रिज्यूम बनाने और उसे नियमित रूप से अपडेट रखने की अहमियत भी समझाई गई। वक्ताओं ने कहा कि कई बार छात्र अच्छे अवसर केवल इसलिए खो देते हैं क्योंकि उनका रिज्यूम पुराना होता है या उसमें सही जानकारी नहीं होती।
छात्रों को बताया गया कि रिज्यूम केवल डिग्री का दस्तावेज नहीं, बल्कि उनकी पहचान का आईना होता है। उसमें स्किल्स, इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट्स और उपलब्धियों को साफ-सुथरे तरीके से शामिल करना चाहिए।
स्टार्टअप और उद्यमिता की ओर बढ़ते कदम
NSS शिविर में खास तौर पर स्टार्टअप और उद्यमिता पर चर्चा ने छात्रों का ध्यान आकर्षित किया। वक्ताओं ने बताया कि सरकार की कई योजनाएं युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स, एग्रीटेक और सर्विस सेक्टर जैसे क्षेत्रों में नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं।
छात्रों से कहा गया कि वे अपने आसपास की समस्याओं को पहचानें और उनके समाधान के रूप में स्टार्टअप आइडिया विकसित करें। उदाहरण देते हुए बताया गया कि कई सफल स्टार्टअप छोटे शहरों और गांवों से शुरू होकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं।
प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने भी साझा किए विचार
महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. सुरेंद्र नागिया ने कहा कि NSS जैसे शिविर छात्रों को केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं सिखाते, बल्कि उन्हें जीवन की वास्तविक चुनौतियों के लिए भी तैयार करते हैं। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे सीखने की प्रक्रिया को कभी न रोकें और हर नए अवसर को अपनाने का प्रयास करें।
कार्यक्रम में डॉ. देवेंद्र, डॉ. विरेंद्र सिंह, डॉ. गुरमीत सैनी और डॉ. सचिन सहित स्टाफ सदस्य मौजूद रहे। सभी शिक्षकों ने छात्रों को अपने लक्ष्य स्पष्ट रखने और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी।
युवाओं के लिए बदलती रोजगार की तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में पारंपरिक नौकरियों की संख्या कम हो सकती है, जबकि फ्रीलांसिंग और डिजिटल उद्यमिता के अवसर बढ़ेंगे। ऐसे में कॉलेज स्तर पर ही छात्रों को उद्यमिता के लिए प्रेरित करना समय की मांग है। NSS शिविर जैसे कार्यक्रम युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास देते हैं।
आज के युवा केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वे खुद अवसर पैदा करने की सोच रखते हैं। यह बदलाव भारत की अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
छात्रों में दिखा उत्साह और नई सोच
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने भी अपने सवाल पूछे और स्टार्टअप शुरू करने से जुड़े अनुभव जानने की कोशिश की। कई छात्रों ने बताया कि उन्हें पहली बार समझ आया कि कॉलेज के दौरान ही बिजनेस आइडिया पर काम शुरू किया जा सकता है।
छात्रों का कहना था कि ऐसे कार्यक्रम उन्हें नई दिशा देते हैं और करियर के प्रति जागरूक बनाते हैं। NSS शिविर के माध्यम से उन्हें टीमवर्क, नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ-साथ उद्यमिता की भी प्रेरणा मिली।
शिक्षा और उद्यम का बढ़ता रिश्ता
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी कम होना जरूरी है। कॉलेजों में यदि नियमित रूप से ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, तो छात्र पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान भी हासिल कर सकते हैं। इससे बेरोजगारी की समस्या कम करने में भी मदद मिल सकती है।
महाबीर नरवाल ने कहा कि भविष्य उन्हीं युवाओं का है जो जोखिम लेने से नहीं डरते। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे असफलता से घबराएं नहीं, बल्कि उसे सीखने का अवसर समझें।
निष्कर्ष: आत्मनिर्भर भारत की ओर एक कदम
NSS शिविर का यह आयोजन केवल एक व्याख्यान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छात्रों के मन में नई सोच और आत्मनिर्भरता का बीज बो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युवाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
राजकीय महाविद्यालय घराैंडा में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का उदाहरण बना कि कैसे शिक्षा संस्थान युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बना सकते हैं। आने वाले समय में ऐसे प्रयास छात्रों के भविष्य और समाज दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।
