निर्दयी हमला! ईरानी राष्ट्रपति ने PM मोदी को फोन कर पहलगाम हमले की जताई तीखी निंदा

निर्दयी हमला! ईरानी राष्ट्रपति ने PM मोदी को फोन कर पहलगाम हमले की जताई तीखी निंदा
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नई दिल्ली
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को समर्थन मिलना शुरू हो गया है। शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत कर इस नृशंस हमले की तीखी निंदा की और पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

22 अप्रैल को हुए इस आतंकी हमले ने घाटी को एक बार फिर दहला दिया, जब पहलगाम की बैसारन घाटी में निर्दोष पर्यटकों को निशाना बनाया गया। हमले में 26 लोगों की जान चली गई। यह घटना 2019 के पुलवामा हमले के बाद से कश्मीर घाटी में सबसे बड़ी और सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक मानी जा रही है।

आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का संदेश

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने जानकारी दी कि ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बातचीत के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा,
“आतंकवाद के लिए दुनिया में कोई जगह नहीं है।”

बातचीत में दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि आतंकवाद किसी भी तर्क या परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। मानवता में विश्वास रखने वाले सभी देशों और लोगों को इस वैश्विक खतरे के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़नी चाहिए।

विदेश मंत्रालय ने कहा,

“भारत और ईरान आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता में विश्वास करते हैं और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए मिलकर प्रयास जारी रखेंगे।”

पहलगाम हमला: घाटी की रूह कंपा देने वाली घटना

22 अप्रैल को जब पहलगाम की खूबसूरत बैसारन घाटी पर्यटकों से गुलजार थी, तभी आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। कई पर्यटक इस हमले का शिकार हो गए। स्थानीय सुरक्षाबलों ने तत्परता दिखाते हुए मोर्चा संभाला, लेकिन तब तक 26 निर्दोष जानें जा चुकी थीं।

यह हमला 2019 में पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले की भयावह यादों को ताजा कर गया। उस समय भी देशभर में गुस्सा और शोक की लहर दौड़ गई थी। अब एक बार फिर घाटी में अमन-चैन को चुनौती दी गई है।

ईरान का भारत के प्रति समर्थन

ईरानी दूतावास ने भी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट करते हुए भारत के प्रति अपनी एकजुटता का संदेश दिया। पोस्ट में कहा गया कि दोनों देशों की आतंकवाद विरोधी साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा और क्षेत्रीय शांति स्थापित करने के लिए मिलकर काम किया जाएगा।

ईरानी राष्ट्रपति ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि भारत में निर्दोष नागरिकों पर हुआ यह हमला केवल भारत के खिलाफ ही नहीं, बल्कि मानवता के खिलाफ एक हमला है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं के खिलाफ वैश्विक स्तर पर सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया आभार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति के समर्थन और संवेदना के लिए आभार व्यक्त किया। पीएम मोदी ने कहा कि नई दिल्ली भी इस बात में विश्वास रखती है कि क्षेत्रीय सहयोग और एकता आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई के लिए आवश्यक हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हमेशा से अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है और इसके लिए कूटनीति को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने ईरान की इस क्षेत्र में रचनात्मक भूमिका की सराहना की और विश्वास जताया कि मिलकर आतंकवाद जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकता है।

आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई की जरूरत

आज दुनिया भर में आतंकवाद एक साझा चुनौती बन चुका है। चाहे वह दक्षिण एशिया हो, पश्चिम एशिया या अफ्रीका, आतंकवादी घटनाएं मानवता को जख्मी कर रही हैं। ऐसे में दुनिया के बड़े देशों का एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाना और मिलकर कार्य करना समय की मांग बन गई है।

ईरानी राष्ट्रपति और भारतीय प्रधानमंत्री की यह बातचीत इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे यह संदेश भी जाता है कि आतंकवाद किसी भी जाति, धर्म या राष्ट्र से ऊपर उठकर पूरी मानवता के लिए खतरा है।

कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की सक्रियता

भारत लगातार आतंकवाद के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जोर देता रहा है। चाहे वह संयुक्त राष्ट्र हो या शंघाई सहयोग संगठन (SCO), भारत ने हमेशा यह मांग की है कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और समन्वित नीति अपनाई जाए।

अब ईरान जैसे महत्वपूर्ण देश के समर्थन से भारत का रुख और मजबूत हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियान की इस बातचीत से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी यह स्पष्ट संदेश गया है कि आतंकवाद को लेकर अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मिलकर कदम

भारत और ईरान दोनों ही दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता को लेकर गहरी रुचि रखते हैं। दोनों देशों को आतंकवाद से न केवल सीधे बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से भी नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे में यह साझेदारी न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को भी सशक्त करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत और ईरान मिलकर आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाते हैं, तो इससे इस क्षेत्र में कट्टरपंथी ताकतों को बड़ा झटका लगेगा।

निष्कर्ष: आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता ही समाधान

पहलगाम जैसे आतंकी हमलों से लड़ने के लिए सिर्फ सुरक्षाबलों की सतर्कता ही नहीं, बल्कि वैश्विक समुदाय की एकजुटता भी जरूरी है। ईरान का भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना इस लड़ाई को नैतिक बल देता है।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियान की यह पहल न केवल आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूती देगी, बल्कि आने वाले समय में दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया में शांति के नए द्वार भी खोलेगी।

आतंकवाद के खिलाफ यह एकजुटता ही दुनिया को एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण स्थान बना सकती है।

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