बर्मिंघम। IND vs ENG एजबेस्टन टेस्ट 2025 में टीम इंडिया एक बार फिर इतिहास बदलने के इरादे से मैदान में उतरेगी, लेकिन यह राह उतनी आसान नहीं है। शुभमन गिल की अगुवाई में भारत की युवा ब्रिगेड बुधवार से एजबेस्टन के मैदान पर उतरने जा रही है, जहां 58 सालों से एक जीत का इंतजार अभी भी अधूरा है। इस मैदान पर भारतीय टीम ने 1967 से लेकर अब तक 8 टेस्ट मैच खेले हैं लेकिन जीत का खाता अभी भी शून्य पर ही है।
BCCI का ट्वीट: ‘लड़ने को तैयार है टीम इंडिया’
मैच से पहले BCCI ने अपने आधिकारिक X (पूर्व में Twitter) हैंडल से एक प्रेरणादायक वीडियो साझा किया है:
इस वीडियो में खिलाड़ी मैदान में पसीना बहाते दिख रहे हैं, कमेंट्री की गूंज, बल्ले की आवाज और उत्साहपूर्ण संगीत – सब मिलकर एक संदेश देते हैं कि भारत अब इतिहास बदलने को तैयार है। BCCI ने कैप्शन में लिखा:
“हर चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार, हर रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए तैयार – एजबेस्टन में उतर रही है एक नई भारत टीम! 🇮🇳🔥 #INDvsENG”
इस ट्वीट ने लाखों क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में उत्साह भर दिया है और उम्मीदें और भी बढ़ा दी हैं।
एजबेस्टन: भारत के लिए ‘नरक’ सा अनुभव
जब भी भारत और इंग्लैंड की टेस्ट टक्कर की बात होती है, तो बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान का ज़िक्र जरूर होता है। यह मैदान इंग्लैंड के लिए जितना सौभाग्यशाली रहा है, भारत के लिए उतना ही दुष्कर। भारतीय टीम ने एजबेस्टन में पहला टेस्ट जुलाई 1967 में खेला था और तब से लेकर 2022 तक कुल 8 टेस्ट मुकाबले खेले हैं – लेकिन जीत एक भी नहीं।
एजबेस्टन में भारत-इंग्लैंड के सभी टेस्ट मुकाबले:
| वर्ष | परिणाम |
|---|---|
| 1967 | भारत 132 रन से हारा |
| 1974 | भारत पारी और 78 रन से हारा |
| 1979 | भारत पारी और 83 रन से हारा |
| 1986 | मैच ड्रॉ |
| 1996 | भारत 8 विकेट से हारा |
| 2011 | भारत पारी और 242 रन से हारा |
| 2018 | भारत 31 रन से हारा |
| 2022 | भारत 7 विकेट से हारा |
कुल रिकॉर्ड:
जीत: 0
टेस्ट मैच खेले: 8
हार: 7
ड्रॉ: 1
मनोवैज्ञानिक दबाव भी बड़ी चुनौती
कोई भी खिलाड़ी हो या कप्तान – जब भी वह एजबेस्टन के मैदान पर उतरता है, भारत के पिछले आंकड़े उसके दिमाग में जरूर गूंजते हैं। ऐसे में कप्तान शुभमन गिल के सामने न सिर्फ इंग्लैंड की टीम, बल्कि मैदान के मनोवैज्ञानिक दबाव से निपटना भी एक बड़ी चुनौती होगी।
शुभमन पहली बार इस ऐतिहासिक मैदान पर टेस्ट की अगुवाई करेंगे। उनके पास युवा जोश है, यशस्वी जायसवाल और ऋषभ पंत जैसे मैच जिताऊ खिलाड़ी हैं, लेकिन क्या वे इतिहास बदल पाएंगे?
भारत की संभावित प्लेइंग इलेवन
- ओपनर्स: यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल
- मिडिल ऑर्डर: साई सुदर्शन, शुभमन गिल (कप्तान), ऋषभ पंत (विकेटकीपर)
- ऑलराउंडर: रविंद्र जडेजा, वॉशिंगटन सुंदर
- तेज गेंदबाज़: मोहम्मद सिराज, शार्दुल ठाकुर, प्रसिद्ध कृष्णा
- स्पिनर: कुलदीप यादव
स्टैंडबाय पर: अभिमन्यु ईश्वरन, नीतीश रेड्डी, ध्रुव जुरेल, आकाश दीप, अर्शदीप सिंह
जसप्रीत बुमराह की गैरमौजूदगी चिंता का विषय
बुमराह जो कि पहले ही सीरीज में एक मुकाबला खेल चुके हैं, इस टेस्ट से बाहर हो सकते हैं। हेड कोच गौतम गंभीर पहले ही संकेत दे चुके हैं कि बुमराह केवल तीन टेस्ट में ही खेलेंगे। बुमराह की गैरहाजिरी भारत की गेंदबाजी आक्रमण को थोड़ा कमजोर कर सकती है, खासकर एजबेस्टन जैसी पिच पर, जहां स्विंग और सीम का खेल होता है।
लोअर ऑर्डर की फॉर्म चिंता का विषय
पिछले कुछ वर्षों से टीम इंडिया का लोअर ऑर्डर दबाव की स्थिति में टिक नहीं पाया है। जब भी टॉप ऑर्डर जल्दी आउट होता है, तो निचले क्रम के बल्लेबाजों से उम्मीद रहती है – लेकिन वहां प्रदर्शन स्थिर नहीं रहा है। एजबेस्टन में अगर भारत को लड़ाई में बने रहना है, तो 7वें नंबर के बाद भी योगदान जरूरी होगा।
इंग्लैंड की टीम: बैजबॉल रणनीति का धमाका
इंग्लैंड ने पिछले कुछ सालों में ‘बैजबॉल’ नाम की आक्रामक क्रिकेट शैली विकसित की है – जिसमें तेजी से रन बनाना, बड़े स्कोर की बजाय दबाव बनाना और विरोधी टीम को मानसिक रूप से थकाना शामिल है।
इंग्लैंड की स्क्वॉड इस प्रकार है:
जैक क्राउली, बेन डकेट, जो रूट, हैरी ब्रूक, ओली पोप, बेन स्टोक्स (कप्तान), जोफ्रा आर्चर, क्रिस वोक्स, शोएब बशीर, जैकब बेथेल, ब्रायडन कार्स, सैम कुक, जोश टंग, जेमी ओवर्टन, जेमी स्मिथ
उम्मीद की किरण: भारत की नई पीढ़ी
टीम इंडिया के लिए अच्छी खबर यह है कि इस टीम में वह एक्स फैक्टर है, जो मुश्किल पलों में मैच का रुख मोड़ सकता है। शुभमन गिल खुद एक क्लासिक खिलाड़ी हैं, वहीं यशस्वी जायसवाल में गाबा जैसा आत्मविश्वास है।
ऋषभ पंत की वापसी भारत के लिए गेम चेंजर हो सकती है। उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी किसी भी वक्त मैच को भारत की तरफ मोड़ सकती है।
रणनीतिक विश्लेषण
- टॉस का महत्व: एजबेस्टन में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम को मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलती है।
- स्पिन बनाम स्विंग: कुलदीप यादव और जडेजा की भूमिका अहम रहेगी, लेकिन पिच अगर स्विंग के अनुकूल रही, तो प्रसिद्ध कृष्णा या सिराज को बढ़त मिल सकती है।
- बैटिंग डिप्थ: वॉशिंगटन सुंदर या शार्दुल जैसे ऑलराउंडर टीम को बैलेंस देते हैं।
क्या खत्म होगा 58 साल का सूखा?
यह सवाल सिर्फ क्रिकेट प्रेमियों का नहीं, बल्कि इतिहास के पन्नों में दर्ज भारत की हार की पीड़ाओं से जुड़ा है। शुभमन गिल की टीम क्या इस बार जीत का वह पेड़ उगा पाएगी जिसकी जड़ें 1967 में सूख गई थीं?
बुधवार को जब पहली गेंद एजबेस्टन की पिच पर गिरेगी, तो पूरा भारत यही उम्मीद करेगा – इस बार इतिहास बदलेगा।
