IND vs ENG: टेस्ट में ‘हर बार ढहता लोअर ऑर्डर’ बना टीम इंडिया की हार की सबसे बड़ी वजह

IND vs ENG: टेस्ट में 'हर बार ढहता लोअर ऑर्डर' बना टीम इंडिया की हार की सबसे बड़ी वजह
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करनाल। लोअर ऑर्डर की बल्लेबाजी अब भारतीय टेस्ट टीम के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुकी है। 2024 में भारतीय क्रिकेट के टेस्ट सफर की समीक्षा करें तो सबसे निराशाजनक पहलू रहा है—टीम का निचला क्रम, जो बार-बार ताश के पत्तों की तरह बिखर जाता है। लेटेस्ट उदाहरण लीड्स टेस्ट है, जहां इंग्लैंड के खिलाफ टीम इंडिया को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा।

जब 2 जुलाई से एजबेस्टन में दूसरा टेस्ट शुरू होगा, तब भारत के पास अपनी पिछली गलतियों से सबक लेकर रणनीति बदलने का मौका होगा। लेकिन सबसे जरूरी बात है—निचले क्रम की बल्लेबाजी को मजबूत करना, जो बार-बार भारतीय जीत की संभावनाओं को तोड़ देती है।

लीड्स टेस्ट: कैसे लोअर ऑर्डर बना टीम की हार की वजह?

लीड्स टेस्ट में भारत की हार सिर्फ इंग्लिश गेंदबाजों के कहर से नहीं हुई, बल्कि टीम इंडिया के लोअर ऑर्डर की बल्लेबाजी ने भी उसमें बराबरी का योगदान दिया।

  • पहली पारी में भारतीय टीम ने अंतिम 7 विकेट 41 रनों पर गंवाए।
  • दूसरी पारी में हाल और भी बदतर रहे— 31 रनों पर 6 विकेट गिर गए।

अगर शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल और ऋषभ पंत को अलग कर दें, तो बाकी 7 बल्लेबाजों ने दोनों पारियों में मात्र 95 रन बनाए। ज़ाहिर है कि अगर निचले क्रम ने सिर्फ 50-60 रन और जोड़ दिए होते, तो इंग्लैंड के सामने 400 का लक्ष्य खड़ा हो सकता था।

साल 2024 के आंकड़े: भारत सबसे कमजोर

भारतीय टीम का लोअर ऑर्डर 2024 में टेस्ट क्रिकेट की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर उभरा है।

  • अब तक 9 मौके ऐसे आए जब आखिरी 5 विकेट मिलाकर 50 से भी कम रन बना सके।
  • बाक़ी सभी अंतरराष्ट्रीय टीमों में यह आंकड़ा सिर्फ 7 बार हुआ है।
  • भारत का लोअर ऑर्डर बैटिंग एवरेज 18.93 रहा है—जो WTC की सभी 9 टीमों में सबसे नीचे है।

भारत के गेंदबाजों का औसत बेहद खराब:

2024 में 7 भारतीय तेज गेंदबाजों ने नंबर 7 या नीचे बल्लेबाजी की, जिनका औसत केवल 5.8 रहा है। इनमें प्रमुख नाम हैं:

  • जसप्रीत बुमराह
  • मोहम्मद सिराज
  • प्रसिद्ध कृष्णा

इन सभी का फर्स्ट क्लास बल्लेबाजी एवरेज 10 से भी कम है।

इंग्लैंड की तुलना में भारत पीछे क्यों?

इंग्लैंड के लोअर ऑर्डर की मजबूती भारत को शर्मिंदा करती है।
लीड्स टेस्ट में इंग्लैंड के 8, 9, 10 नंबर पर खेलने वाले तेज गेंदबाजों के औसत देखें:

  • क्रिस वोक्स: 31.52
  • ब्रायडन कार्स: 29.73
  • जोश टंग: 14.73

ये सभी कमजोर नहीं, मजबूत विकल्प बनकर उभरे हैं। यह इंग्लैंड की रणनीतिक श्रेष्ठता को दर्शाता है, जिसमें गेंदबाज सिर्फ गेंदबाजी नहीं, ज़रूरत पड़ने पर बल्ले से भी लड़ते हैं।

अंतिम 4 और 3 विकेट: भारत की नाकामी और गहराती

2024 में भारत का आखिरी 4 विकेटों का औसत 17.79 रहा, जो फिर से सभी टीमों में सबसे नीचे है।
जबकि आखिरी 3 विकेटों की बात करें तो सिर्फ श्रीलंका (23.60) भारत (25.77) से बदतर प्रदर्शन कर पाया है।

2020 से अब तक का प्रदर्शन: भारत का ग्राफ नीचे

अगर हम 2020 से लेकर अब तक देखें तो भारत का ग्राफ लगातार गिरता रहा है:

  • 2020 से टेस्ट में ऐसे तेज गेंदबाज जिनके:
    • 20 से ज्यादा विकेट हैं और
    • 10+ की बैटिंग एवरेज है—
      तो भारत के पास ऐसे सिर्फ 2 गेंदबाज हैं।
  • इस सूची में भारत का स्थान नीचे से तीसरा है।
  • सिर्फ श्रीलंका और अफगानिस्तान की स्थिति भारत से बदतर है।

लोअर ऑर्डर में क्यों हो रही है इतनी कमजोरी?

1. ऑलराउंडर की कमी

कभी टीम में कपिल देव, इरफान पठान या रवींद्र जडेजा जैसे खिलाड़ी होते थे, जो गेंद के साथ-साथ बल्ले से भी बड़ा योगदान देते थे। आज टीम में ऐसा स्थायी ऑलराउंडर नहीं है।

2. गेंदबाजों की तकनीकी कमजोरी

तेज गेंदबाजों का प्राथमिक फोकस सिर्फ गेंदबाजी है। उनके फर्स्ट क्लास आंकड़े बताते हैं कि उनमें बल्लेबाजी को लेकर कोई स्पष्ट योजना या अभ्यास नहीं होता।

3. नेट्स में बल्लेबाजी का समय कम

गेंदबाजों को अक्सर नेट्स में बल्लेबाजी की उतनी तैयारी नहीं करवाई जाती जितनी ज़रूरी है। इसकी भरपाई मैचों में नजर आती है।

हल क्या है? भारतीय टीम को क्या करना होगा?

1. ऑलराउंडर खिलाड़ियों को मौका देना

टीम प्रबंधन को ऐसे खिलाड़ियों पर ध्यान देना होगा जो गेंदबाजी के साथ-साथ 30-40 रन बनाने की काबिलियत भी रखते हों।

2. गेंदबाजों की बल्लेबाजी पर खास कोचिंग

अलग से कोचिंग स्टाफ बनाया जाए जो लोअर ऑर्डर बल्लेबाजों पर काम करे।

3. रणनीतिक बदलाव

जब भी टीम संकट में हो, तो टेल-एंडर्स को सिर्फ टिकने नहीं, कुछ रन बनाने के लक्ष्य के साथ भेजा जाए।

क्या इतिहास में भी लोअर ऑर्डर ने रच दिए हैं चमत्कार?

बिलकुल! इतिहास गवाह है कि कई बार लोअर ऑर्डर ने भारत को मैच जिताए हैं। उदाहरण:

  • 1986: कपिल देव और मनिंदर सिंह ने इंग्लैंड के खिलाफ 9वें विकेट के लिए 51 रन जोड़कर मैच बचाया।
  • 2001: हरभजन सिंह और अनिल कुंबले की साझेदारी से भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराया।

यह बताता है कि इच्छाशक्ति और योजना से लोअर ऑर्डर भी मैच बदल सकता है।

निष्कर्ष

भारतीय टीम को यदि टेस्ट क्रिकेट में शिखर पर पहुंचना है तो केवल टॉप ऑर्डर या बॉलिंग यूनिट पर निर्भरता काफी नहीं। आज जब हर टीम हर विभाग में सशक्त हो रही है, तब भारत के लिए लोअर ऑर्डर की बल्लेबाजी को दुरुस्त करना अत्यावश्यक हो गया है।

न सिर्फ कोचिंग स्टाफ बल्कि चयनकर्ताओं को भी यह सोचना होगा कि क्या हम सिर्फ विकेट लेने वाले गेंदबाजों पर दांव लगा रहे हैं या फिर उन पर भी जिनके पास बल्ले से भी कुछ कर गुजरने की क्षमता है?

जब तक टीम इंडिया का लोअर ऑर्डर मजबूत नहीं होगा, तब तक हर टेस्ट जीत मुश्किल, और विदेशी धरती पर सीरीज जीत लगभग असंभव ही रहेगा।

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