क्रिकेट में LBW नियम यानी लेग बिफोर विकेट का नाम सुनते ही दिमाग में कई सवाल उठ जाते हैं। कई बार मैच देखते हुए दर्शक भी कंफ्यूज हो जाते हैं कि आखिर कब बल्लेबाज LBW आउट होगा और कब नहीं। खासकर तब, जब बल्लेबाज शॉट खेलने की कोशिश ही न करे और गेंद सीधे उसके पैड से टकरा जाए। ऐसे में क्या होगा? क्या ये आउट माना जाएगा या नहीं? इस रहस्य को सुलझाने के लिए हमने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) के BCCI-प्रमाणित लेवल-II अंपायर प्रदीप रावल से खास बातचीत की। साथ ही, पूर्व इंटरनेशनल अंपायर अनिल चौधरी के एक पुराने बयान को भी संदर्भ के तौर पर लिया।
LBW नियम को लेकर फैन्स की उलझन
अक्सर टीवी स्क्रीन पर हम देखते हैं—दाएं हाथ का बल्लेबाज क्रीज पर है, गेंदबाज ने शानदार डिलीवरी फेंकी, गेंद सीधे पैड पर लगी। बल्लेबाज ने बल्ला तक नहीं लगाया। अंपायर की उंगली ऊपर… और भीड़ में शोर! लेकिन दूसरी ओर, कई बार ऐसी ही गेंद पर अंपायर ‘नॉट आउट’ भी दे देता है। यही वो जगह है जहां दर्शकों के मन में सवाल उठते हैं—ऐसा क्यों?
प्रदीप रावल कहते हैं, “LBW सिर्फ पैड पर गेंद लगने से तय नहीं होता। इसमें कई शर्तें हैं—गेंद कहां पिच हुई, इम्पैक्ट कहां हुआ, बल्लेबाज शॉट खेल रहा था या नहीं, गेंद की ऊंचाई क्या थी, और सबसे अहम—क्या गेंद स्टम्प पर लगती?”
अगर बल्लेबाज जानबूझकर पैड से रोके गेंद…
मान लीजिए, बल्लेबाज शॉट खेलने की कोशिश ही नहीं कर रहा। वो पैड को ऑफ स्टम्प के बाहर बढ़ाकर गेंद को गिरा देता है। अब सवाल—क्या वो LBW आउट होगा?
अंपायर रावल बताते हैं, “अगर गेंद स्टम्प की लाइन में पिच हुई है और बल्लेबाज ने कोई शॉट नहीं खेला, तथा गेंद विकेट से टकराती, तो LBW आउट हो सकता है। यहां गेंद की ऊंचाई भी मायने रखती है। अगर गेंद विकेट के ऊपर से जा रही है तो नॉट आउट, वरना आउट।”
LBW कब बिल्कुल नहीं हो सकता?
अंपायर रावल ने LBW न होने के चार पक्के कारण बताए—
- नो बॉल – अगर गेंदबाज ने नो बॉल की है, तो LBW आउट नहीं दिया जाएगा।
- लेग स्टम्प के बाहर पिच – दाएं हाथ के बल्लेबाज के लिए अगर गेंद लेग स्टम्प के बाहर पिच हुई है, तो LBW संभव नहीं।
- पहले बैट, फिर पैड – अगर गेंद पहले बैट पर लगी और फिर पैड पर, तो LBW नहीं हो सकता।
- गेंद स्टम्प को मिस कर रही हो – चाहे कहीं भी पिच हो, अगर गेंद विकेट को नहीं लगने वाली थी, तो LBW आउट नहीं होगा।
LBW कब होगा? ये समझना जरूरी
LBW का फैसला लेने में अंपायर को कई बातों को एक साथ देखना पड़ता है—
- फेयर डिलीवरी – नो बॉल नहीं होनी चाहिए।
- पिचिंग – गेंद विकेट की लाइन में या ऑफ स्टम्प के बाहर पिच हो सकती है, लेकिन लेग स्टम्प के बाहर नहीं।
- इम्पैक्ट – गेंद पैड पर ऐसी जगह लगे जहां से लग रहा हो कि ये स्टम्प से टकराती।
- ऊंचाई – गेंद की हाइट विकेट की बेल्स के नीचे होनी चाहिए।
ऑफ स्टम्प के बाहर की पेचीदगी
- अगर गेंद ऑफ स्टम्प के बाहर पिच हुई और बल्लेबाज ने खेलने की कोशिश की—तो LBW नहीं होगा।
- लेकिन अगर उसने गेंद को छोड़ा और गेंद अंदर आकर स्टम्प से टकरा सकती थी, तो आउट दिया जा सकता है।
टाइट गैप वाला केस – बैट और पैड साथ-साथ
क्रिकेट में एक और दिलचस्प स्थिति तब बनती है, जब बैट और पैड में बहुत कम गैप हो और गेंद लगने पर ये तय करना मुश्किल हो कि पहले बैट लगा या पैड। ऐसे मामलों में टीवी अंपायर भी मैदान के अंपायर के फैसले के साथ चलते हैं। यानी अगर मैदान में आउट दिया गया तो आउट ही रहेगा, और नॉट आउट दिया तो नॉट आउट ही रहेगा।
LBW नियम का इतिहास और बदलाव
LBW नियम की शुरुआत 1774 में हुई थी। पहले यह केवल तब लागू होता था जब बल्लेबाज जानबूझकर पैड से गेंद रोकता था। लेकिन समय के साथ नियम में बदलाव हुआ और अब इसमें इम्पैक्ट, पिचिंग, और गेंद की ऊंचाई भी अहम कारक हैं।
DRS (Decision Review System) और LBW
आधुनिक क्रिकेट में DRS ने LBW के फैसलों को और पारदर्शी बनाया है। DRS में ‘हॉक-आई’ तकनीक गेंद की ट्रैजेक्ट्री दिखाती है। तीन अहम हिस्से हैं—
- Pitching – गेंद कहां पिच हुई।
- Impact – पैड पर कहां लगी।
- Hitting the Stumps – गेंद विकेट को हिट करती या नहीं।
अगर तीनों शर्तें पूरी हों, तो ऑन-फील्ड अंपायर का फैसला पलटा जा सकता है।
अंपायरों के अनुसार LBW का मनोविज्ञान
प्रदीप रावल बताते हैं, “LBW के मामलों में अंपायर का आत्मविश्वास बहुत मायने रखता है। अगर पिचिंग और इम्पैक्ट सही दिख रहा है और गेंद की ऊंचाई बेल्स से नीचे है, तो अंपायर उंगली उठा देता है।”
खिलाड़ियों की रणनीति
कई बल्लेबाज LBW से बचने के लिए पैड को आगे निकालते हैं ताकि अंपायर को शंका हो और वो आउट न दें। वहीं, गेंदबाज कोशिश करते हैं कि गेंद स्विंग या स्पिन होकर स्टम्प की लाइन में आए।
निष्कर्ष
LBW नियम क्रिकेट का सबसे पेचीदा लेकिन रोमांचक हिस्सा है। यह न सिर्फ अंपायर के निर्णय कौशल की परीक्षा लेता है, बल्कि दर्शकों के धैर्य और समझ की भी। अगर आप क्रिकेट फैन हैं, तो इस नियम की बारीकियां समझकर आप मैच का आनंद दोगुना कर सकते हैं।
